कुवैत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पेश की गई रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। कुवैत सरकार का कहना है कि ईरान पर बनाई गई इस रिपोर्ट में ईरान द्वारा किए गए हवाई हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा नहीं की गई है। कुवैत के अधिकारियों ने रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए ‘जवाबी हमले’ शब्द पर कड़ी आपत्ति जताई है और कहा है कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल गैरकानूनी हमलों को सही ठहराने और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही को कमजोर करने का काम करता है।

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कुवैत पर कितने हुए हमले और क्या हुआ नुकसान?

28 फरवरी 2026 से लेकर 8 मार्च 2026 के बीच कुवैत पर कई बड़े हवाई हमले किए गए हैं। इन हमलों ने कुवैत के आम लोगों और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया है।

  • कुवैत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान कुल 234 मिसाइलें और 422 ड्रोन कुवैत की सीमा में दागे गए।
  • इन हमलों में कुवैत की सेना और सुरक्षा बलों के चार जवान शहीद हुए हैं और कई आम नागरिक घायल भी हुए हैं।
  • हमलों में Kuwait International Airport, फ्यूल स्टोरेज यूनिट और पब्लिक इंस्टीट्यूशन फॉर सोशल सिक्योरिटी के मुख्यालय पर सीधा नुकसान हुआ है।
  • कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है और पिछले 24 घंटों में ही सेना ने चार और दुश्मन ड्रोन को हवा में नष्ट किया है।

संयुक्त राष्ट्र में कुवैत ने क्या कहा?

जिनेवा में कुवैत के स्थायी प्रतिनिधि नासर अल-हयेन और न्यूयॉर्क में प्रतिनिधि तारिक अल्बनाई ने संयुक्त राष्ट्र के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी देश पर इस तरह के हवाई हमले एक बहुत ही खतरनाक स्थिति पैदा करते हैं।

कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 (आत्मरक्षा का अधिकार) का हवाला देते हुए अपने सैन्य बचाव को सही बताया है। इसके अलावा, कुवैत ने जानकारी दी कि इन हमलों का असर कुवैत स्थित US Embassy पर भी पड़ा है, जो कि वियना कन्वेंशन के नियमों का सीधा उल्लंघन है। कुवैत ने यह बात भी पूरी तरह स्पष्ट कर दी है कि वह चल रहे किसी भी क्षेत्रीय विवाद का हिस्सा नहीं है और ईरान के हमलों को किसी भी तरह से सही नहीं माना जा सकता।