Kuwait का UN में बड़ा बयान, ईरान की आक्रामकता पर कहा- अब चुप रहना मुमकिन नहीं
संयुक्त राष्ट्र में कुवैत के प्रतिनिधि Nasser Al-Hayen ने ईरान की ओर से बढ़ती आक्रामकता और उस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि खाड़ी देशों के लिए यह स्थिति अब असहनीय हो गई है। 25 मार्च 2026 को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को संबोधित करते हुए उन्होंने ईरान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है। कुवैत ने साफ कहा कि ईरान की ओर से बुनियादी ढांचों पर होने वाले हमले खाड़ी देशों के लिए अस्तित्व का खतरा बन गए हैं।
कुवैत और खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों का क्या है पूरा मामला?
28 फरवरी 2026 से ईरान ने कुवैत सहित बहरीन, जॉर्डन, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर सैन्य हमले शुरू किए हैं। इन हमलों के विरोध में कुवैत के विदेश मंत्री Sheikh Jarrah Jaber Al-Ahmad Al-Sabah ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
- ईरान की ओर से बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले लगातार जारी हैं।
- कुवैत के नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
- हमलों में कुवैत के चार सुरक्षाकर्मियों की जान जाने की खबर आई है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 11 मार्च 2026 को इन हमलों की निंदा करते हुए प्रस्ताव 2817 पारित किया था।
- कुवैत ने संयुक्त राष्ट्र को 3 मार्च और 9 मार्च को पत्र लिखकर हमलों की पूरी जानकारी दी थी।
कुवैत एयरपोर्ट पर हुआ ड्रोन हमला और वर्तमान स्थिति
ताजा घटनाक्रम में 25 मार्च 2026 को एक ईरानी ड्रोन कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक से टकरा गया, जिससे वहां आग लग गई। नागरिक उड्डयन विभाग के प्रवक्ता Abdullah Al Rajhi ने पुष्टि की है कि इसमें संपत्ति का नुकसान हुआ है लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ है। कुवैत का एयर डिफेंस सिस्टम लगातार इन हमलों को नाकाम करने की कोशिश कर रहा है।
| तारीख | मुख्य घटना |
|---|---|
| 28 फरवरी 2026 | ईरान की ओर से सैन्य आक्रामकता की शुरुआत |
| 11 मार्च 2026 | UN Security Council ने प्रस्ताव 2817 को अपनाया |
| 24 मार्च 2026 | ईरान ने कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ाई |
| 25 मार्च 2026 | कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला और UN में अहम चर्चा |
ईरान के राजदूत Ali Bahreini ने जिनेवा में अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उनके नागरिक अमेरिका और इजरायल के हमलों से खतरे में हैं। हालांकि, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है और आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने इस पूरे संघर्ष को बेहद खतरनाक और अनिश्चित बताया है।




