लेबनान में इज़राइली हवाई हमलों से भारी तबाही, 300 लोगों की मौत और 1800 घायल, बेरूत में इमारतें जमींदोज.
लेबनान की राजधानी बेरूत और आसपास के इलाकों में इज़राइल ने भीषण बमबारी की है. बुधवार और गुरुवार को हुए इन हमलों में अब तक 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 1,800 से अधिक लोग घायल हुए हैं. ऐन अल-मरैसेह जैसे रिहायशी इलाकों में बहुमंजिला इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं. बचाव दल अभी भी मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने की कोशिशों में जुटे हैं, जबकि कई परिवार अपना सब कुछ खो चुके हैं और अपनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.
इस भीषण हमले में कितना नुकसान हुआ और प्रशासन का क्या कहना है?
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार, इन हमलों में मरने वालों में 100 से अधिक महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं. बेरूत के ऐन अल-मरैसेह इलाके में एक बहुमंजिला इमारत आंशिक रूप से ढह गई, जहां निवासी मलबे के बीच से अपना फर्नीचर और जरूरी सामान बचाने की कोशिश करते देखे गए. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इन हमलों को बर्बर करार दिया है. वहीं प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने मारे गए लोगों के सम्मान में गुरुवार, 9 अप्रैल को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है. अस्पतालों में घायलों की भारी भीड़ है और बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुँचा है.
लेबनान हमले से जुड़ी मुख्य जानकारी और आंकड़े
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल मौतें | 300 से अधिक (8-9 अप्रैल के दौरान) |
| घायलों की संख्या | 1,800 से अधिक |
| मुख्य निशाना | हिज़्बुल्लाह के कमांड सेंटर और हथियार डिपो |
| प्रमुख हताहत | हिज़्बुल्लाह नेता का सहयोगी अली यूसुफ हरशी |
| प्रभावित क्षेत्र | बेरूत, बेका घाटी, सिडोन और दक्षिणी लेबनान |
| यूएन की प्रतिक्रिया | महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमलों की कड़ी निंदा की |
इज़राइली सेना ने दावा किया है कि उनका उद्देश्य नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को खत्म करना है. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने तबाही के पैमाने को भयावह और अविश्वसनीय बताया है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए संघर्ष-विराम समझौते को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि इज़राइल का कहना है कि यह समझौता लेबनान में चल रहे उनके अभियान पर लागू नहीं होता. स्थानीय निवासी विस्साम तबिला के अनुसार, सामान तो दोबारा मिल सकता है लेकिन परिवार का कोई विकल्प नहीं होता, इसलिए लोग जान बचने पर राहत जता रहे हैं.





