लेबनान में जारी जंग को रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में बड़ी बातचीत होनी थी। लेकिन तनाव बढ़ने की वजह से अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance का दौरा टल गया है। इस बीच इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच सीज़फ़ायर का समझौता भी हुआ है, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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खबर के मुताबिक, 19 जून 2026 को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को स्विट्जरलैंड जाना था, लेकिन उनका यह दौरा स्थगित कर दिया गया। व्हाइट हाउस ने इसके लिए लॉजिस्टिकल कारणों का हवाला दिया, जबकि कुछ रिपोर्टों में इसे लेबनान में बढ़ती लड़ाई और इसराइली सैन्य कार्रवाई से जोड़कर देखा गया।

इस पूरी बातचीत के पीछे एक बड़ा समझौता है। 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ था। इस समझौते का मकसद युद्ध को खत्म करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के लिए 60 दिनों की बातचीत शुरू करना था।

इस डील की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और पूरी तरह बंद होनी चाहिए। ईरान ने साफ़ कर दिया था कि जब तक लेबनान में लड़ाई नहीं रुकती, वह बातचीत की मेज पर नहीं आएगा। हिज़बुल्लाह के नेताओं ने भी इसी बात को दोहराया था।

हालांकि 19 जून को इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच सीज़फ़ायर पर सहमति बनी, लेकिन इसके बाद भी इसराइल के हमलों ने इस समझौते को खतरे में डाल दिया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसराइली कार्रवाइयों पर अपनी नाराजगी जताई और कहा कि इससे डिप्लोमैटिक कोशिशों को नुकसान पहुँच रहा है।

इन बातचीत को सफल बनाने के लिए ओमान, पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff शनिवार, 20 जून 2026 के आसपास बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड पहुँच सकते हैं। Jared Kushner भी इस सिलसिले में स्विट्जरलैंड में मौजूद थे। स्विट्जरलैंड ने पुष्टि की है कि बातचीत टली है, लेकिन वे इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।