लेबनान में हालात बेहद खराब हो गए हैं और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के कारण 10 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। पिछले दो हफ्तों के भीतर लेबनान की करीब 18 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो चुकी है। इजरायली सेना ने दक्षिण लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई और तेज कर दी है जिससे एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है।

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विस्थापन के ताजा आंकड़े और जमीनी हालात क्या हैं?

International Organization for Migration (IOM) के आंकड़ों के अनुसार लेबनान में विस्थापितों की संख्या 1,049,328 तक पहुंच गई है। इनमें से एक बड़ी संख्या उन लोगों की है जो बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जी रहे हैं। जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • करीब 1.32 लाख लोग भीड़भाड़ वाले सरकारी आश्रय केंद्रों में रहने को मजबूर हैं।
  • पिछले दो हफ्तों में 2.50 लाख से ज्यादा लोग लेबनान छोड़कर जा चुके हैं।
  • सीरिया की सीमा पार करने वालों में 1.25 लाख लोग शामिल हैं जिनमें लेबनानी नागरिक भी हैं।
  • इजरायली सेना ने 100 से ज्यादा गांवों और शहरों को खाली करने का सख्त आदेश दिया है।
  • यह खाली कराया गया इलाका लगभग 1,470 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की क्या भूमिका है?

लेबनान में बढ़ते संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है। UN और अन्य संस्थाओं ने फंड की कमी को लेकर चिंता जाहिर की है। सहायता कार्यों का विवरण नीचे दिया गया है:

संस्था/देश सहायता या अपडेट
Irish Aid 8,000 थर्मल कंबल बेरूत भेजे गए।
UN Appeal 30.8 करोड़ डॉलर की जरूरत में से केवल 30% फंड मिला।
Human Rights Watch नागरिकों को निशाना बनाने को युद्ध अपराध बताया।
UNICEF बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताई।
Israeli Military 162nd Division को जमीनी हमले के लिए तैनात किया।

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि वे लेबनान में बफर जोन का विस्तार कर रहे हैं। वहीं लेबनान के राष्ट्रपति ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। मौजूदा हालातों के बीच आम नागरिकों के लिए सुरक्षित ठिकानों की कमी होती जा रही है और राहत शिविरों पर भी हमले की खबरें आ रही हैं।