Strait of Hormuz पर Macron और MBS का बड़ा फैसला, जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और लेबनान में युद्धविराम की मांग
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर गहरी चर्चा की है। दोनों नेताओं ने Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेबनान में भी युद्धविराम को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि इलाके में शांति लौट सके।
इस्लामाबाद में क्या चल रही हैं बातचीत और क्या है असर
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति Macron ने ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से भी बात की और उनसे अपील की कि इस्लामाबाद talks का इस्तेमाल स्थायी शांति के लिए किया जाए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ Asim Munir ने सभी पक्षों द्वारा दिखाए गए संयम की तारीफ की है।
Strait of Hormuz को लेकर क्या है विवाद और दावे
समुद्री रास्ते को लेकर अमेरिका और ईरान के दावों में बड़ा अंतर है। ईरान ने चेतावनी दी है कि Strait of Hormuz का एक बड़ा हिस्सा प्रतिबंधित है और वहां से गुजरने के लिए ईरानी सेना की मंजूरी और टोल देना होगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि उनकी सेना ने रास्ता साफ कर दिया है और ईरानी माइन-लेइंग नावों को नष्ट कर दिया है, हालांकि ईरान ने अमेरिकी जहाजों के गुजरने की बात से इनकार किया है।
| पक्ष | दावा और स्टैंड |
|---|---|
| अमेरिका | रास्ता साफ कर दिया है और ईरानी नावों को नष्ट किया है |
| ईरान | रास्ता प्रतिबंधित है, टोल देना होगा और अमेरिकी जहाज नहीं गुजरे |
| फ्रांस और सऊदी | सुरक्षित आवाजाही जल्द बहाल हो और लेबनान में युद्धविराम हो |
| पाकिस्तान | शांति वार्ता के जरिए मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है |
दुनिया के लिए यह रास्ता क्यों जरूरी है
Strait of Hormuz अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सबके लिए खुला रहना चाहिए। फ्रांस का मानना है कि ईरान द्वारा इस रास्ते को रोकना वैश्विक सप्लाई चेन के लिए एक बड़ा खतरा है। ब्रिटेन ने भी बिना किसी शर्त के इस रास्ते को पूरी तरह खोलने की बात कही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सैन्य ताकत से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इसके लिए एक बड़े राजनयिक प्रयास की जरूरत है।




