MEA News Update: अमेरिकी नौसेना नहीं कर रही भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल, सरकार ने दावों को बताया फेक
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन खबरों और दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ईरान के खिलाफ अभियानों के लिए भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रही है। मंत्रालय ने इन दावों को ‘फेक और झूठा’ बताते हुए साफ किया है कि भारत की जमीन या बंदरगाहों का इस्तेमाल किसी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जा रहा है। यह स्पष्टीकरण एक अमेरिकी न्यूज चैनल पर किए गए दावों के बाद आया है।
किसने किए थे ये दावे और सरकार ने क्या कहा?
अमेरिका के ‘वन अमेरिका न्यूज नेटवर्क’ (OAN) पर पूर्व सैन्य सलाहकार डगलस मैकग्रेगर ने आरोप लगाया था कि अमेरिकी नौसेना मुंबई और कोच्चि के बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी स्वायत्तता बनाए रखता है और किसी भी सैन्य संघर्ष में बिना सोचे-समझे शामिल नहीं होता है।
- मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर ‘फेक न्यूज अलर्ट’ जारी किया है।
- मुंबई और कोच्चि के बंदरगाहों के इस्तेमाल की बात को मनगढ़ंत बताया गया है।
- LEMOA समझौता केवल रसद और ईंधन के लिए है, युद्ध अभियानों के लिए नहीं।
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों पर क्या होगा असर?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। खाड़ी देशों में लगभग 10 मिलियन (1 करोड़) भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। विदेश मंत्रालय ने ईरान की यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है और एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है ताकि प्रवासियों को किसी भी आपात स्थिति में मदद मिल सके।
| महत्वपूर्ण तथ्य | ताजा जानकारी |
|---|---|
| दावा करने वाला सूत्र | OAN चैनल (अमेरिका) |
| प्रभावित बंदरगाहों के नाम | मुंबई और कोच्चि (दावा गलत पाया गया) |
| प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा | कंट्रोल रूम स्थापित किया गया |
| व्यापारिक मार्ग | स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिलहाल बंद |
समुद्री सुरक्षा के जानकारों का कहना है कि हाल ही में श्रीलंकाई तट के पास एक ईरानी युद्धपोत के डूबने के बाद से अफवाहों का बाजार गर्म है। भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों को सलाह दी है कि वे फिलहाल सुरक्षित बंदरगाहों पर ही रुकें और पश्चिम एशियाई समुद्री रास्तों से बचें। शिपिंग कंपनियां अब केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे सामान की आवाजाही में समय अधिक लग रहा है।




