मिडिल ईस्ट तनाव से शेयर बाज़ार गिरा, Nifty और Sensex लाल निशान में, कच्चा तेल 102 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब भारतीय शेयर बाज़ार पर दिखने लगा है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को Nifty और Sensex दोनों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच शांति बातचीत टूटने और अमेरिका द्वारा समुद्री नाकाबंदी की घोषणा के बाद निवेशकों में डर बढ़ गया, जिससे बाज़ार नीचे गिर गया।
बाज़ार में कितनी गिरावट आई और क्या था मुख्य कारण
सोमवार को भारतीय बाज़ार भारी दबाव में रहे। Nifty 50 करीब 0.86% गिरकर 23,842.65 पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex 0.91% की गिरावट के साथ 76,847.57 पर रहा। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का फेल होना और अमेरिका का ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी करने का फैसला था। साथ ही इसराइल द्वारा फिर से हमले की तैयारी ने बाज़ार के माहौल को और खराब कर दिया।
कच्चे तेल की कीमत और आम आदमी पर असर
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। Brent crude तेल 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जो एक दिन में 7% से ज़्यादा की बढ़त है। दुनिया के करीब 20% ईंधन Strait of Hormuz के रास्ते से जाता है, इसलिए वहां तनाव होने से तेल महंगा हो रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे महंगाई बढ़ सकती है, रुपये की कीमत गिर सकती है और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
विदेशी निवेश और सेक्टर का क्या हाल है
विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ार से अपना पैसा तेज़ी से निकाल रहे हैं। साल 2026 में अब तक करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये बाहर जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में ज़्यादा है। बाज़ार के ज़्यादातर सेक्टरों में बिकवाली देखी गई, हालाँकि डिफेंस शेयरों में थोड़ी रिकवरी हुई।
| विवरण | जानकारी / स्थिति |
|---|---|
| Nifty 50 | 0.86% गिरावट (23,842.65) |
| BSE Sensex | 0.91% गिरावट (76,847.57) |
| Brent Crude तेल | 102 डॉलर प्रति बैरल |
| FPI निकासी (2026) | ₹1.8 लाख करोड़ |
| FPI निकासी (2025) | ₹1.66 लाख करोड़ |
| Auto, IT, FMCG सेक्टर | गिरावट दर्ज |
| डिफेंस सेक्टर | मामूली रिकवरी |




