मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच सूकुक (Sukuk) मार्केट में हलचल बढ़ गई है। S&P Global Ratings के मुताबिक, साल 2026 की पहली तिमाही में ग्लोबल सूकुक इश्यूएंस बढ़कर 62.4 अरब डॉलर हो गए, जो पिछले साल इसी समय 52.6 अरब डॉलर थे। हालांकि, युद्ध की वजह से कुछ गंभीर रिस्क भी सामने आए हैं जो निवेशकों की चिंता बढ़ा सकते हैं।

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सूकुक मार्केट में कितनी बढ़त हुई और क्या है मुख्य खतरा?

S&P की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल मार्केट में सूकुक निवेश बढ़ा है और इसमें विदेशी मुद्रा वाले सूकुक की हिस्सेदारी करीब 20% रही। लेकिन विश्लेषक Mohamad Damak ने चेतावनी दी है कि इंडस्ट्रियल और कमर्शियल रियल एस्टेट से जुड़े सूकुक सबसे ज्यादा खतरे में हैं। अगर युद्ध के दौरान इन संपत्तियों को भौतिक नुकसान होता है, तो पैसा वापस मिलने (repayment) में दिक्कत आ सकती है।

कुवैत की स्थिति और बैंकिंग नियमों में क्या बदलाव हुए?

S&P ने कुवैत की क्रेडिट रेटिंग ‘AA-/A-1+’ के साथ स्थिर रखी है और माना है कि कुवैत के पास पर्याप्त वित्तीय संपत्ति है। बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी को मजबूत करने के लिए Central Bank of Kuwait ने कुछ नए नियम लागू किए हैं:

नियम/पैरामीटर नया अपडेट
Liquidity Coverage Ratio (LCR) 80% तक कम किया गया
Net Stable Funding (NSFR) 80% तक कम किया गया
Loan-to-Deposit Ratio Ceiling 100% तक बढ़ाया गया

निवेशकों और कंपनियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

कानूनी फर्म White & Case LLP ने सलाह दी है कि कंपनियों को अपने सूकुक डॉक्यूमेंट्स की बारीकी से जांच करनी चाहिए। युद्ध जैसी स्थितियों में संपत्तियों के नुकसान का जोखिम रहता है, इसलिए ग्रेस पीरियड और डिजोल्यूशन इवेंट्स जैसे कानूनी प्रावधानों को समझना जरूरी है। S&P का मानना है कि युद्ध की अवधि और GCC देशों की अर्थव्यवस्था पर इसके असर के आधार पर 2026 में सूकुक इश्यूएंस की मात्रा कम हो सकती है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.