NATO ने खाड़ी और क्षेत्र के अन्य देशों के खिलाफ ईरान के अंधाधुंध हमलों की कड़ी निंदा की है। 25 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, NATO ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन माना है। NATO के महासचिव Mark Rutte ने खाड़ी क्षेत्र के अपने सहयोगियों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण एकजुटता व्यक्त की है।

🚨: NATO का बड़ा ऐलान, सऊदी और खाड़ी देशों को मिला अपनी रक्षा के लिए हमले रोकने का अधिकार

NATO ने ईरान की किन हरकतों पर जताई चिंता?

NATO ने हाल के समय में हुए ईरान के हमलों को क्षेत्रीय शांति के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। इस मामले में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं:

  • NATO प्रमुख Mark Rutte ने UAE के राष्ट्रपति Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan से फोन पर बातचीत की और ईरान के हमलों को आतंकवादी हमला करार दिया।
  • इन हमलों में नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है जिससे आम लोगों को खतरा पैदा हुआ है।
  • NATO का कहना है कि ईरान की मिसाइल क्षमताएं न केवल मध्य पूर्व बल्कि यूरोप और वैश्विक स्तर के लिए भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
  • गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को रोकने के लिए अमेरिकी प्रयासों का समर्थन कर रहा है।

खाड़ी देशों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?

NATO ने अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर अपनी तैयारी बढ़ा दी है। इस दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

तारीख महत्वपूर्ण घटना/फैसला
25 मार्च 2026 NATO ने आधिकारिक रूप से हमलों की निंदा की और क्षेत्रीय सहयोगियों को समर्थन का आश्वासन दिया।
22 मार्च 2026 Strait of Hormuz की सुरक्षा के लिए 22 देशों के गठबंधन के साथ मिलकर काम करने की घोषणा हुई।
7 मार्च 2026 तुर्किये की ओर दागी गई ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल को NATO ने सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट किया।
6 मार्च 2026 बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अलर्ट लेवल को बढ़ाने का फैसला लिया गया।

NATO के इस रुख से सऊदी अरब, UAE, बहरीन, ओमान और कुवैत जैसे देशों को सुरक्षा का भरोसा मिला है। NATO के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल Radmila Sekerinska ने भी पुख्ता किया है कि खाड़ी देशों के साथ इस्तांबुल सहयोग पहल (Istanbul Cooperation Initiative) के तहत बातचीत जारी रहेगी ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।