Oil Price Update: हॉर्मुज संकट से 120 डॉलर तक जा सकता है कच्चा तेल, फित्च ने जारी किया नया डेटा
कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़ी खबर सामने आ रही है। रेटिंग एजेंसी फित्च (Fitch Ratings) के मुताबिक, अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रास्ता अगले छह महीने तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। सऊदी अरब की न्यूज एजेंसी ने इस बारे में जानकारी साझा की है। यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम माना जाता है और इसमें कोई भी रुकावट सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालती है।
तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?
फित्च रेटिंग्स की विशेषज्ञ एंजलिना फालाविना ने बताया कि सामान्य तौर पर 2026 में कच्चे तेल का औसत दाम 63 डॉलर रहने का अनुमान है। लेकिन अगर हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण रास्ते पर सप्लाई रुकती है, तो सबसे खराब स्थिति में यह दाम 120 डॉलर तक जा सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दुनिया में तेल की सप्लाई बढ़ने वाली है, जिससे स्थिति को कुछ हद तक संभाला जा सकता है।
- ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स: इनके विश्लेषण के मुताबिक एक महीने के बंद से दाम 105 डॉलर हो सकते हैं।
- हाशिम अक्ल: ऊर्जा विशेषज्ञ ने भी 120 डॉलर के पार जाने की आशंका जताई है।
- बाजार की स्थिति: सप्लाई में कमी के डर से निवेशक और कंपनियां लगातार खरीदारी कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
इस संकट को देखते हुए अमेरिका और यूरोपीय देशों ने तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिका जल्द ही ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है ताकि एशियाई बाजारों में तेल की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें। वहीं फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा बढ़ाने के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं।
| देश | हालिया कदम |
|---|---|
| अमेरिका | ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटाने की योजना पर काम जारी |
| भारत और पाकिस्तान | इन देशों के जहाज हाल ही में हॉर्मुज के रास्ते गुजरे हैं |
| फ्रांस और जापान | समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन में सहयोग की पेशकश की |
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर काफी अहम है क्योंकि तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर फ्लाइट के टिकटों और ट्रांसपोर्टेशन की कीमतों पर पड़ता है। फिलहाल ईरान ने कुछ सीमित जहाजों को अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी है, जिसे उसकी ताकत दिखाने के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में अगर तनाव कम नहीं हुआ तो ग्लोबल मार्केट में काफी अस्थिरता देखी जा सकती है।




