Middle East Tension: कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार पहुंचा भाव
खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। कुवैत न्यूज़ एजेंसी (KUNA) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने के डर से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है।
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कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आया इतना उछाल
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए क्षेत्रीय विवाद के बाद से तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।
- Brent Crude: इसका भाव 100 से 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। 9 मार्च को यह 119.50 डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
- WTI Crude: 13 मार्च को इसकी कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं।
- कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz कमर्शियल टैंकरों के लिए बंद रहता है तो आने वाले कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
इमरजेंसी स्टॉक और सप्लाई की स्थिति
इस संकट से निपटने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अपने इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया है। इसमें से 172 मिलियन बैरल तेल अकेले अमेरिका ने अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से दिया है। हालांकि बाजार में चिंता बनी हुई है क्योंकि अगर सप्लाई पूरी तरह रुकती है तो दुनिया को हर दिन 20 मिलियन बैरल तेल का नुकसान हो सकता है। IEA का अनुमान है कि मार्च 2026 में ग्लोबल सप्लाई में 8 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट आएगी।
कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (KPC) ने 7 मार्च 2026 से फोर्स मेज्योर लागू कर रखा है। समुद्री सुरक्षा पर खतरे और जहाजों की भारी कमी के कारण कच्चे और रिफाइंड प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है। ईरान के नेतृत्व ने भी Strait of Hormuz को बंद करने का संकेत दिया है जिससे इस रूट पर कमर्शियल ट्रैफिक पूरी तरह रुक गया है।
आम आदमी और एविएशन सेक्टर पर प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से आम लोगों पर सीधा असर पड़ने लगा है। अमेरिका में गैसोलिन की औसत कीमत 3.45 डॉलर प्रति गैलन को पार कर गई है और एक्सपर्ट्स के अनुसार यह जल्द 4 डॉलर तक पहुंच जाएगी। इसका असर दुनिया के बाकी देशों में भी पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ेगा।
कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फ्यूल टैंक को नुकसान पहुंचने की आधिकारिक खबर सामने आई है। कुवैत एविएशन फ्यूलिंग (Kafco) इस स्थिति को संभाल रही है और अधिकारियों का कहना है कि मामला फिलहाल नियंत्रण में है। अगर तेल की सप्लाई में बाधा बनी रहती है तो खाड़ी देशों में काम करने वाले और सफर करने वाले प्रवासियों को आने वाले समय में महंगी फ्लाइट टिकट का सामना करना पड़ सकता है।




