यरुशलम में सोमालीलैंड द्वारा दूतावास खोलने की योजना पर ओमान सहित दुनिया के 15 मुस्लिम देशों ने कड़ा रुख अपनाया है। ओमान के विदेश मंत्रालय और अन्य खाड़ी देशों ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। इन देशों का साफ कहना है कि यरुशलम के ऐतिहासिक और कानूनी दर्जे के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
15 देशों ने मिलकर उठाया यह बड़ा कदम
सोमालीलैंड की इस घोषणा के बाद सऊदी अरब, मिस्र, कतर, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, ओमान, सूडान, यमन, लेबनान, मॉरिटानिया, जिबूती, सोमालिया और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इन सभी देशों ने मिलकर सोमालीलैंड के फैसले की कड़ी आलोचना की है। दरअसल सोमालीलैंड ने 19 मई 2026 को यरुशलम में अपना दूतावास स्थापित करने की घोषणा की थी, जिसके बाद यह विरोध शुरू हुआ है।
ओमान के विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति
ओमान के विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए सोमालीलैंड के इस फैसले को अवैध और खारिज करने योग्य बताया है। ओमान सरकार ने स्पष्ट किया कि पूर्वी यरुशलम 1967 से ही अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र का हिस्सा रहा है। ऐसे में वहां किसी भी देश द्वारा दूतावास खोलने या उसकी स्थिति बदलने का कोई भी प्रयास पूरी तरह से अमान्य माना जाएगा। इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को मान्यता दी थी, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच यह तालमेल बढ़ा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सोमालीलैंड यरुशलम में क्या करने की योजना बना रहा है?
सोमालीलैंड ने यरुशलम में अपना नया दूतावास खोलने का एलान किया है, जिसका ओमान सहित 15 मुस्लिम देशों ने कड़ा विरोध किया है।
ओमान और अन्य मुस्लिम देशों ने इस कदम का विरोध क्यों किया?
इन देशों का कहना है कि पूर्वी यरुशलम 1967 से फिलिस्तीन का हिस्सा है और वहां दूतावास खोलना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन है।