Oman-Iran New Protocol: ओमान और ईरान के बीच बड़ी बैठक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में जहाजों के लिए अब परमिट होगा ज़रूरी.
ओमान और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों के बीच 5 अप्रैल 2026 को एक अहम बैठक हुई है जिसका मकसद इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। ईरान की तरफ से कहा गया है कि अब इस रास्ते से गुजरने के लिए पहले से परमिट और समझौते की ज़रूरत होगी। यह नया नियम सुरक्षा और बेहतर सुविधा सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है ताकि इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर किसी भी तरह की परेशानी न हो।
नया नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या है?
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने बताया है कि ईरान और ओमान एक नए नेविगेशन सिस्टम और जॉइंट प्रोटोकॉल को अंतिम रूप देने के आखिरी चरण में हैं। उनका कहना है कि युद्ध जैसी स्थितियों को शांति काल के नियमों से नहीं चलाया जा सकता है। अब सभी जहाजों को ओमान और ईरान दोनों देशों से पहले अनुमति लेनी होगी और समझौते करने होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम जहाजों को रोकने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षित रास्ता और बेहतर सेवाएं देने के लिए उठाया गया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय दबाव का असर
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ़ किया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ का भविष्य केवल ईरान और ओमान ही तय करेंगे और इसमें बाहरी देशों का कोई दखल नहीं होना चाहिए। ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल बुसैदी ने भी सुरक्षित आवाजाही के लिए ठोस इंतज़ाम करने की पुष्टि की है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत यह एक महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य है जहां से दुनिया का काफी तेल गुजरता है। ईरान का कहना है कि दुश्मन देशों के जहाजों पर कुछ पाबंदियां लागू रहेंगी जो ईरान के खिलाफ गतिविधियों में शामिल हैं।
महत्वपूर्ण जानकारी और अपडेट्स
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बैठक की तारीख | 5 अप्रैल 2026 |
| प्रभावी क्षेत्र | स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) |
| नया नियम | पहले से परमिट और एग्रीमेंट अनिवार्य होगा |
| शामिल देश | ओमान और ईरान |
| अधिकारी | काज़ेम ग़रीबाबादी, अब्बास अरागची, सैयद बद्र अल बुसैदी |
इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री जहाजों पर पड़ेगा जो गल्फ देशों से होकर गुजरते हैं। भारतीय प्रवासियों और व्यापारियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मार्ग में किसी भी बदलाव का असर माल ढुलाई और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।




