Oman US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का ओमान ने किया स्वागत, खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर आई है. दोनों देशों ने दो हफ्ते के युद्धविराम पर अपनी सहमति दे दी है. ओमान की सरकार ने इस फैसले का औपचारिक रूप से स्वागत किया है और इस मामले में पाकिस्तान की तरफ से की गई मध्यस्थता की तारीफ की है. ओमान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए अब बातचीत के जरिए विवाद को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत है.
इस युद्धविराम समझौते में क्या शर्तें शामिल हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अप्रैल 2026 को इस समझौते का ऐलान किया था. इसमें सबसे जरूरी शर्त ईरान की तरफ से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सुरक्षित और पूरी तरह से खोलना रखा गया है. ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस दो हफ्ते के विराम को स्वीकार कर लिया है. हालांकि ईरान ने यह भी साफ किया है कि यह युद्ध का पूरी तरह अंत नहीं है, बल्कि एक मौका है. अगर अमेरिका की तरफ से हमले रुकते हैं तो ईरान की सेना भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई को रोक देगी और समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही में मदद करेगी.
शांति वार्ता और क्षेत्रीय प्रभाव से जुड़ी मुख्य बातें
इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने मुख्य भूमिका निभाई है और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने का काम किया है. इस समझौते से जुड़े कुछ अहम बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- इस्लामाबाद में बातचीत: शुक्रवार से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत शुरू होने वाली है.
- इसराइल का रुख: इसराइल ने भी इस दो हफ्ते के युद्धविराम को अपनी मंजूरी दे दी है, हालांकि यह लेबनान में चल रही लड़ाई पर लागू नहीं होगा.
- आर्थिक प्रभाव: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने से कच्चे तेल की सप्लाई और समुद्री व्यापार में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी राहत की स्थिति बनेगी.
- सैन्य स्थिति: अमेरिका ने अपनी आक्रामक सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया है लेकिन रक्षा के लिए अलर्ट सिस्टम अभी भी एक्टिव रखा गया है.
ओमान ने हमेशा से ही बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है. खाड़ी देशों के लिए यह खबर काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि युद्ध जैसी स्थिति से वहां रहने वाले लाखों विदेशी कामगारों और कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा था. अब सबकी नजरें शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर टिकी हैं.




