पाकिस्तान में आम आदमी की कमर एक बार फिर टूट गई है। सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर भारी टैक्स (लेवी) लगा दिया है, जिससे महंगाई अब आसमान छू रही है। इस फैसले के बाद देश भर में गुस्सा है और पेट्रोल पंप मालिकों से लेकर वकीलों तक ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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पेट्रोल-डीज़ल के नए रेट क्या हैं और कितनी बढ़ी कीमतें?

सरकार ने 9 मई 2026 से नए दाम और टैक्स लागू कर दिए हैं। पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में करीब 15 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। सरकार का लक्ष्य इस टैक्स के ज़रिए साल भर में 1.4 ट्रिलियन रुपये जमा करना है। आम जनता के लिए अब ईंधन खरीदना और भी महंगा हो गया है।

ईंधन का प्रकार नई लेवी (प्रति लीटर) कीमत में बढ़ोतरी
पेट्रोल Rs 117.41 Rs 14.92
हाई स्पीड डीज़ल Rs 42.60 Rs 15.00
प्रीमियम फ्यूल (97/95 RON) Rs 305.37 से ज़्यादा
मिट्टी का तेल (Kerosene) Rs 20.36
लाइट डीज़ल ऑयल Rs 15.84
फर्नेस ऑयल Rs 77

सरकार ने दाम क्यों बढ़ाए और लोग क्यों विरोध कर रहे हैं?

पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik ने बताया कि IMF के साथ किए गए समझौतों को पूरा करने के लिए पेट्रोलियम डेवलपमेंट लेवी (PDL) को बढ़ाना ज़रूरी था। उन्होंने भरोसा दिया कि अगर दुनिया में तेल के दाम गिरे तो पाकिस्तान में भी कीमतें तेज़ी से कम होंगी।

दूसरी तरफ, Pakistan Petroleum Dealers Association (PPDA) के उपाध्यक्ष Raja Waseem Shehzad ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारी टैक्स की वजह से लोग पेट्रोल नहीं खरीद पा रहे हैं, जिससे पेट्रोल पंप मालिकों की बिक्री कम हो गई है और उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।

Supreme Court Bar Association (SCBA) के अध्यक्ष Haroonur Rashid और सचिव Malik Zahid Aslam Awan ने भी इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस बढ़ोतरी से गरीब जनता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पेट्रोल के दाम घटाए जाएं और बिजली के बिलों में भी राहत दी जाए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल के दाम क्यों बढ़ाए गए?

सरकार ने International Monetary Fund (IMF) के साथ किए गए समझौतों और शर्तों को पूरा करने के लिए पेट्रोलियम लेवी में बढ़ोतरी की है।

SCBA ने सरकार से क्या मांग की है?

Supreme Court Bar Association ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने और बिजली के टैरिफ व ज़रूरी सामान की कीमतों में कटौती करने की मांग की है।