Pakistan-Iran-US Mediation: पाकिस्तान करा रहा अमेरिका और ईरान के बीच सुलह, 15 सूत्री शांति प्रस्ताव पर ईरान कर रहा विचार
पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है। 26 मार्च 2026 को नेशनल असेंबली में बोलते हुए डार ने कहा कि अमेरिका ने एक 15 सूत्री प्रस्ताव साझा किया है, जिस पर ईरान अभी गंभीरता से विचार कर रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि वे केवल शांति और स्थिरता के लिए यह मध्यस्थता कर रहे हैं।
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शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान की क्या है मुख्य भूमिका?
पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक पुल की तरह काम कर रहा है। विदेश मंत्री Ishaq Dar ने बताया कि दोनों देशों के बीच अभी सीधी बातचीत नहीं हो रही है, इसलिए पाकिस्तान संदेशों को एक तरफ से दूसरी तरफ पहुंचा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में तुर्की और मिस्र भी पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान ने स्पष्ट किया है कि वे इलाके में किसी भी बड़ी जंग को रोकने के लिए कूटनीति का रास्ता अपना रहे हैं।
इस शांति प्रक्रिया से जुड़े मुख्य घटनाक्रम क्या हैं?
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 24 मार्च 2026 | राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने का आदेश दिया। |
| 25 मार्च 2026 | ईरान को अमेरिका की तरफ से 15 सूत्री शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए मिला। |
| 26 मार्च 2026 | विदेश मंत्री डार ने पुष्टि की कि ईरान इन बिंदुओं पर मंथन कर रहा है। |
| अहम मुलाकातें | आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir ने Donald Trump से बात की। |
ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि सीधे तौर पर अमेरिका से बात करने की खबरों को नकारा है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया है कि वे मित्र देशों के माध्यम से संदेशों का जवाब दे रहे हैं।
खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत सफल रहती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों को होगा। तनाव कम होने से हवाई यात्राएं सुरक्षित होंगी और तेल की कीमतों में स्थिरता आएगी। खाड़ी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह एक अच्छी खबर है क्योंकि युद्ध की स्थिति में उनकी सुरक्षा और नौकरी पर संकट मंडराने लगता है। पाकिस्तान ने साफ कहा है कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है।




