Pakistan New Update: जंग किसी के फायदे में नहीं, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की करेगा मेजबानी
पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने दुनिया को संदेश दिया है कि युद्ध से किसी का भी भला नहीं होने वाला है। 29 मार्च 2026 को सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पाकिस्तान ने एक बड़ी जिम्मेदारी लेने की बात कही है। पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत की मेजबानी करने को तैयार है। इस पहल को लेकर खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी सकारात्मक रुख दिखाया है और शांति की उम्मीद जताई है।
शांति वार्ता और पाकिस्तान की नई भूमिका क्या है?
पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत कराने के लिए एक मंच देने को तैयार है। विदेश मंत्री Ishaq Dar, जो पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री भी हैं, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कूटनीति के जरिए ही क्षेत्र में शांति लाई जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान दोनों ने ही पाकिस्तान की इस भूमिका पर भरोसा जताया है।
- Ishaq Dar: इन्होंने कहा कि युद्ध से केवल नुकसान होता है और बातचीत ही शांति का एकमात्र रास्ता है।
- समर्थन: चीन और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी पाकिस्तान के इस शांति प्रयास की सराहना की है।
- उद्देश्य: इस कोशिश का मुख्य मकसद पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को खत्म करना और शांति कायम करना है।
- मेजबानी: इस्लामाबाद में होने वाली इस संभावित बैठक में बड़े देशों के शामिल होने की उम्मीद है।
सऊदी अरब और सहयोगी देशों का इस पर क्या कहना है?
सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के साथ बैठक की। इस मुलाकात में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता जताई। पाकिस्तान ने इस बात की भी तारीफ की कि सऊदी अरब ने संकट के समय में बहुत ही संयम से काम लिया है। इस शांति मिशन में मिस्र और तुर्की भी पाकिस्तान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
| देश | अधिकारी का नाम | मुख्य जिम्मेदारी |
|---|---|---|
| पाकिस्तान | Ishaq Dar | शांति वार्ता की मेजबानी का प्रस्ताव |
| सऊदी अरब | Prince Faisal bin Farhan | क्षेत्रीय शांति के लिए समर्थन |
| मिस्र | Badr Abdelatty | तनाव कम करने के लिए सहयोग |
| तुर्की | Hakan Fidan | डिप्लोमैटिक बातचीत का समर्थन |
इन बैठकों का असर खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों पर भी पड़ेगा। अगर क्षेत्र में शांति बनी रहती है, तो वहां काम करने वाले भारतीयों और अन्य विदेशियों के लिए व्यापार और सुरक्षा के हालात बेहतर रहेंगे। पाकिस्तान के इस कदम को मिडिल ईस्ट में स्थिरता लाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।




