Strait of Hormuz में तनाव बहुत बढ़ गया है। 12 अप्रैल 2026 को दो पाकिस्तानी ऑयल टैंकरों को रास्ता न मिलने की वजह से वापस लौटना पड़ा। उसी समय अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता भी टूट गई है, जिससे पूरे इलाके में हलचल मची हुई है। इस स्थिति का असर आने वाले समय में तेल की सप्लाई और समुद्री रास्तों पर पड़ सकता है।

ℹ️: Trump का बड़ा फैसला, Strait of Hormuz की होगी नाकाबंदी, ईरान के साथ शांति वार्ता रही नाकाम

पाकिस्तानी जहाज़ों के साथ क्या हुआ और क्या है स्थिति

ईरानी मीडिया और Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अप्रैल को Khairpur और Shalamar नाम के दो पाकिस्तानी जहाज़ Strait of Hormuz से गुजर नहीं पाए और उन्हें वापस मुड़ना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि इन जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिल सका। हालांकि, बाद में यह खबर आई कि Khairpur जहाज़ ने ईरानी कॉरिडोर के ज़रिये दोबारा अंदर जाने की कोशिश की।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत क्यों टूटी

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता चल रही थी, लेकिन 12 अप्रैल को यह बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को नहीं माना, खासकर परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बातों पर। ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा।

नाकेबंदी की धमकी और ईरान का कड़ा जवाब

बातचीत विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना तुरंत Strait of Hormuz की नाकेबंदी करेगी। यह कदम उन जहाज़ों के खिलाफ होगा जो ईरान को अवैध टोल दे रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने वहां बिछाई गई माइन्स को नष्ट करने की बात भी कही। जवाब में ईरान की IRGC ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कोई गलती की, तो उसकी सेना को घातक भंवरों (deadly whirlpools) में फंसा दिया जाएगा।

व्यक्ति/संस्था मुख्य बयान/कार्य
JD Vance इस्लामाबाद में शांति वार्ता विफल रही
डोनाल्ड ट्रम्प Hormuz Strait की नाकेबंदी का ऐलान किया
IRGC Navy अमेरिकी सेना को घातक भंवरों की चेतावनी दी
Haji Babaei टोल केवल ईरानी रियाल में देने का आदेश दिया
UN Maritime Chief ईरान को टोल वसूलने से मना किया

ईरान के टोल टैक्स और नियंत्रण का विवाद

ईरानी सांसद हाजी बाबाई ने दावा किया कि Strait of Hormuz पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है और यहाँ से गुजरने वाले जहाज़ों को टोल टैक्स ईरानी रियाल में देना होगा। अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के मुताबिक यह रास्ता सभी के लिए खुला रहना चाहिए, लेकिन ईरान इसे नहीं मानता। संयुक्त राष्ट्र के समुद्री प्रमुख ने साफ कहा कि ईरान को इस अंतरराष्ट्रीय रास्ते पर टोल नहीं वसूलना चाहिए।