कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान बिन जासिम अल थानी ने दुनिया को एक बड़े खतरे के प्रति आगाह किया है। उन्होंने कहा है कि पानी, बिजली और भोजन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से खाड़ी क्षेत्र में गंभीर मानवीय संकट पैदा होने का डर है। कतर ने इसे एक खतरनाक मिसाल बताया है जो सभी देशों के लिए मुसीबत बन सकती है।

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हाल के दिनों में हुए बड़े हमले और खतरे

खाड़ी देशों में पिछले कुछ दिनों के भीतर कई गंभीर घटनाएं घटी हैं जिनसे तनाव बढ़ गया है। कतर के अधिकारियों के मुताबिक ये हमले रेड लाइन पार करने के बराबर हैं।

  • कुवैत: 5 और 6 अप्रैल को कुवैत के दो पानी साफ करने वाले (desalination) प्लांट पर हमले हुए हैं।
  • यूएई: 6 अप्रैल को यूएई ने ईरान की तरफ से आए कई ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया।
  • ईरान: बुशहर परमाणु ऊर्जा प्लांट पर 4 अप्रैल को हमला हुआ जिसमें एक सुरक्षाकर्मी की जान चली गई।
  • कतर: रास लफान एलएनजी (LNG) सुविधा पर भी हमला हुआ है जिससे काफी नुकसान पहुंचा है।

आम जनता और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और इन हमलों का सीधा असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। इन देशों की पूरी आबादी पीने के पानी के लिए सरकारी प्लांट पर निर्भर है।

संसाधन खतरे का असर
पानी के प्लांट पीने के पानी की भारी किल्लत और मानवीय संकट पैदा होगा।
बिजली और ऊर्जा आर्थिक गतिविधियां रुक सकती हैं और दैनिक जीवन प्रभावित होगा।
स्ट्रेच ऑफ हॉर्मुज तेल और गैस की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी।

कतर के प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और नॉर्वे के प्रधानमंत्री से भी फोन पर बात की है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिक सुविधाओं पर हमला करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है और इससे आम लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। कतर ने सभी पक्षों से बातचीत पर लौटने और शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा को बचाया जा सके।