मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। कतर स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डे ‘अल उदेद एयर बेस’ (Al Udeid Air Base) पर तैनात कुछ अमेरिकी कर्मियों को बेस छोड़ने की सलाह दी गई है। इसे ‘पूर्ण निकासी’ नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से ‘पोस्चर चेंज’ (Posture Change) बताया जा रहा है। यह कदम ईरान द्वारा अमेरिकी बेस पर हमले की धमकी देने के बाद उठाया गया है।
कतर (Qatar) में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े मध्य-पूर्व (Middle East) सैन्य अड्डे पर हलचल तेज हो गई है। अल उदेद एयर बेस पर तैनात कुछ अमेरिकी कर्मियों और क्रू मेंबर्स को बुधवार शाम तक बेस छोड़ने की सलाह दी गई है।
क्या यह जंग की आहट है या सिर्फ सावधानी? जानिए इस बड़े डेवलपमेंट की 4 मुख्य बातें:
1. क्या है अमेरिका का आदेश?
रॉयटर्स के मुताबिक, तीन राजनयिकों ने पुष्टि की है कि कुछ कर्मियों को जगह खाली करने (Move out) के लिए कहा गया है।
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यह निकासी नहीं है: एक राजनयिक ने साफ किया कि यह “ऑर्डर्ड इवैक्यूएशन” (पूर्ण निकासी) नहीं है, बल्कि इसे “पोजीशनल चेंज” कहा जा रहा है।
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वजह: आधिकारिक तौर पर कोई खास कारण नहीं बताया गया है, लेकिन इसका सीधा कनेक्शन ईरान के हालात से है।
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फिलहाल दोहा में अमेरिकी दूतावास और कतर सरकार ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
2. ईरान की धमकी और ट्रंप का रुख
ईरान में इस वक्त भारी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और हस्तक्षेप के संकेत दिए हैं।
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ईरान की चेतावनी: तेहरान ने साफ कह दिया है कि अगर वॉशिंगटन ने कोई हमला किया, तो पड़ोसी देशों (जैसे कतर) में स्थित अमेरिकी बेस उनका निशाना बनेंगे।
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इतिहास: गौरतलब है कि पिछले साल जून में भी तनाव के दौरान अल उदेद बेस के पास ईरानी मिसाइल का खतरा मंडराया था।
3. क्यों अहम है अल-उदेद बेस?
यह बेस अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में रीढ़ की हड्डी जैसा है।
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ताकत: यहाँ करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर है।
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हथियार: यहाँ से B-52 बॉम्बर और KC-135 रिफ्यूलर जैसे भारी विमान उड़ान भरते हैं।
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खतरा: यह बेस ईरान की सीमा से महज 200-300 किलोमीटर दूर है, यानी ईरान की मिसाइल रेंज में सबसे पहले आता है।
4. क्या युद्ध होने वाला है?
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहता।
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ईरान में आर्थिक संकट के कारण प्रदर्शन उग्र हो गए हैं।
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ट्रंप प्रशासन द्वारा “सैन्य विकल्पों” पर विचार करने की खबरों के बीच, अपने नॉन-एसेंशियल स्टाफ को हटाना एक एहतियाती कदम (Precautionary Step) माना जा रहा है।




