भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की अपनी पहली मौद्रिक नीति का ऐलान कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला लिया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल बैंकों से लिए गए लोन की किस्तों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा।

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आरबीआई के इस फैसले से जुड़ी मुख्य जानकारी क्या है?

  • पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही रखा गया है।
  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) की दर 5 प्रतिशत पर स्थिर है।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट को 5.5 प्रतिशत पर रखा गया है।
  • आरबीआई ने अपना पॉलिसी रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
  • मनी मार्केट सेगमेंट में अब अतिरिक्त गैर-बैंक संस्थाओं को भी शामिल होने की अनुमति दी गई है।
  • गवर्नर ने बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है।

पश्चिम एशिया तनाव और अर्थव्यवस्था पर इसका असर

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक समस्याओं की वजह से ग्लोबल इकॉनमी में चुनौतियां बनी हुई हैं। हालांकि, हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में उछाल देखा गया और रुपया भी मजबूत हुआ है। बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहेगी। आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में स्थिरता रहने की उम्मीद है, जिससे महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल सकती है।

खास आंकड़ों पर एक नज़र

विवरण दर/अनुमान
रेपो रेट 5.25%
जीडीपी ग्रोथ (FY27) 6.9%
SDF रेट 5%
बैंक रेट 5.5%