संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहरीन की तरफ से लाए गए एक अहम प्रस्ताव को रूस और चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करके रोक दिया है. यह प्रस्ताव ईरान द्वारा बंद किए गए Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए लाया गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर 7 अप्रैल की रात तक यह रास्ता नहीं खुला तो हमला किया जाएगा, लेकिन वोटिंग में रूस और चीन ने इसका कड़ा विरोध किया है.

वोटिंग के दौरान क्या रहा नतीजा और किन देशों ने किया विरोध?

सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में कुल 11 देशों ने इसके समर्थन में वोट दिया था. रूस और चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए इसके खिलाफ वोट दिया, जिसकी वजह से प्रस्ताव पास नहीं हो सका. वहीं Colombia और Pakistan इस वोटिंग से दूर रहे और उन्होंने अपनी राय नहीं दी. बहरीन के विदेश मंत्री Abdullatif bin Rashid Al Zayani ने पुष्टि की है कि एक स्थायी सदस्य के नकारात्मक वोट की वजह से इस प्रस्ताव को नहीं अपनाया जा सका.

Strait of Hormuz विवाद से जुड़ी मुख्य जानकारी

मुख्य घटना तारीख
ईरान ने Strait of Hormuz को बंद किया 28 फरवरी 2026
सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पर वोटिंग हुई 7 अप्रैल 2026
US राष्ट्रपति की हमले की डेडलाइन 7 अप्रैल, रात 8 बजे
बहरीन का पहला प्रस्ताव पास हुआ (13-0) 11 मार्च 2026

ईरान ने इस समुद्री रास्ते को फरवरी में अमेरिका और इसराइल के साथ बढ़ते तनाव के बाद बंद कर दिया था. इस रास्ते के बंद होने से दुनिया भर में तेल और जरूरी सामान की सप्लाई पर बुरा असर पड़ने का खतरा बना हुआ है. बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और ग्लोबल इकोनॉमी के लिए खतरा बताया था.

आम जनता और प्रवासियों पर क्या होगा इसका असर?

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर काफी अहम है. अगर Strait of Hormuz लंबे समय तक बंद रहता है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं और सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है. Donald Trump की डेडलाइन खत्म होने से कुछ घंटे पहले आए इस फैसले के बाद अब खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है. फ्रांस जैसे देशों ने पहले ही कहा था कि सैन्य ताकत से इस रास्ते को खुलवाना काफी जोखिम भरा कदम हो सकता है.