रूस ने उठाया बड़ा कदम, मिडिल ईस्ट में युद्ध रोकने के लिए UN में पेश किया प्रस्ताव, जानिए क्या होगा असर
रूस ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। 9 मार्च 2026 को रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें युद्ध को तुरंत रोकने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य तनाव को खत्म करना और शांति वार्ता शुरू करना है। मिडिल ईस्ट में काम कर रहे भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए यह एक बड़ी खबर है, क्योंकि युद्ध बढ़ने से उनके रोजगार और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।
इस प्रस्ताव में क्या-क्या मांगें रखी गई हैं?
रूस द्वारा पेश किए गए इस ड्राफ्ट में किसी भी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है। इसमें सभी पक्षों से सैन्य गतिविधियों को बिना किसी शर्त के तुरंत रोकने की अपील की गई है। प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले बंद होने चाहिए। इसके साथ ही कूटनीतिक बातचीत पर जोर दिया गया है ताकि क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह ड्राफ्ट UN चार्टर के अनुच्छेद 2(4) पर आधारित है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग को रोकता है।
गल्फ देशों और प्रवासियों पर क्या असर होगा?
मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात ने ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है। इससे गल्फ देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। युद्ध के डर से फिलीपींस और मलेशिया जैसे देशों ने अपने नागरिकों को वहां से निकालना शुरू कर दिया है। खाड़ी देशों (GCC) ने भी इस रूसी प्रस्ताव का समर्थन किया है क्योंकि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जुड़ा हुआ है। गल्फ में रहने वाले भारतीयों को भी मौजूदा हालात पर नजर रखने की जरूरत है।
अमेरिका और चीन का इस मामले पर क्या रुख है?
इस महीने अमेरिका UNSC की अध्यक्षता कर रहा है और अभी तक इस ड्राफ्ट पर वोटिंग के लिए कोई समय तय नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका इस प्रस्ताव पर वीटो लगा सकता है। दूसरी तरफ चीन ने रूस की इस पहल का पूरा समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने सैन्य हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। ईरान ने भी इस कदम का स्वागत किया है और इसे मौजूदा हमलों को रोकने के लिए जरूरी बताया है। इस प्रस्ताव पर आने वाले दिनों में बातचीत शुरू होने की उम्मीद है।





