भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar ने जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul के साथ फोन पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की है। यह बातचीत मंगलवार 10 मार्च 2026 को हुई जिसमें West Asia में जारी गंभीर संघर्ष को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। भारत इस समय क्षेत्र में शांति बहाली और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है।

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West Asia तनाव का भारत और वैश्विक बाजार पर क्या असर होगा?

West Asia में जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस तनाव का असर सीधा ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने की आशंका है। भारत के लिए इस संकट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • Energy Security: भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए सप्लाई चैन को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
  • Indian Nationals: इस क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है।
  • Trade Routes: Strait of Hormuz को बंद करने की ईरान की धमकी ने वैश्विक व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।

भारत की कूटनीतिक कोशिशें और आधिकारिक बयान

विदेश मंत्री S Jaishankar ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि भारत का रुख हमेशा से बातचीत और कूटनीति के पक्ष में रहा है। भारत लगातार तनाव कम करने और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में भारत ने कई महत्वपूर्ण देशों के साथ तालमेल बिठाया है जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:

तारीख देश / प्रतिनिधि मुख्य चर्चा का विषय
10 मार्च 2026 जर्मनी (Johann Wadephul) क्षेत्रीय संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा
11 मार्च 2026 ईरान (Seyed Abbas Araghchi) तनाव कम करने और द्विपक्षीय चिंताएं
मार्च 2026 ओमान, इटली, दक्षिण कोरिया क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक समन्वय

ईरान और US-Israel के बीच बढ़ते हमलों के बाद भारत की कूटनीति अब इस बात पर केंद्रित है कि संघर्ष को और फैलने से कैसे रोका जाए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर कम से कम हो।