Kuwait Security Update: अमेरिका और नाटो कुवैत के साथ खड़े, $16.5 बिलियन के आधुनिक हथियार मिलेंगे
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और नाटो ने कुवैत सहित अन्य GCC देशों को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है। अमेरिकी सरकार ने कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन के लिए 16.5 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी है। इसमें रडार सिस्टम और एयर डिफेंस जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं। यह कदम ईरान की ओर से हो रहे लगातार हमलों और सुरक्षा खतरों को देखते हुए उठाया गया है।
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अमेरिका ने किन हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी है?
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इन हथियारों की बिक्री के लिए आपातकालीन छूट का इस्तेमाल किया है ताकि प्रक्रिया को तेज किया जा सके। इस पैकेज में अकेले कुवैत के लिए 8 अरब डॉलर के LTAMDS रडार और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा UAE और जॉर्डन को भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लड़ाकू विमानों के हथियार दिए जाएंगे। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना खाड़ी देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सहायता जारी रखेगी।
नाटो और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों का इस पर क्या रुख है?
NATO के सदस्य देशों ने भी कुवैत और GCC के साथ पूरी एकजुटता दिखाई है। इस्तांबुल सहयोग पहल (ICI) के माध्यम से कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों की सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की गई है। नाटो ने ईरान के कार्यों को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने भी हमलों की निंदा की है और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की अपील की है।
क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और हालिया घटनाक्रमों का विवरण नीचे दिया गया है:
| तारीख | मुख्य अपडेट |
|---|---|
| 19 मार्च 2026 | $16.5 बिलियन के हथियार सौदे का ऐलान हुआ |
| 10 मार्च 2026 | कुवैत के अमीर ने आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि की |
| 20 मार्च 2026 | नाटो और खाड़ी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पर बैठक हुई |
| 28 फरवरी 2026 | क्षेत्र में सुरक्षा तनाव और हमलों की शुरुआत हुई |
| 12 मार्च 2026 | कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा की |
कुवैत के अमीर शेख मिशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कुवैत अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में तेल, गैस उत्पादन और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र इन तनावों के कारण प्रभावित हो रहे हैं, जिसे देखते हुए यह सैन्य सहायता काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




