जयशंकर ने ईरान, UAE और कतर के विदेश मंत्रियों को लगाया फोन, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत ने शुरू की बड़ी बातचीत.
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार 5 अप्रैल 2026 को ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के अपने समकक्षों के साथ फोन पर बातचीत की है. मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और तनाव को देखते हुए यह राजनयिक चर्चा बहुत अहम मानी जा रही है. जयशंकर ने इन तीनों देशों के नेताओं के साथ क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और शांति बहाली के रास्तों पर विस्तार से चर्चा की है.
इन चर्चाओं के दौरान किन मुख्य बातों पर हुई बातचीत?
विदेश मंत्री ने अलग-अलग देशों के साथ विशिष्ट मुद्दों पर बात की और भारत का पक्ष साझा किया. इन सभी चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना था. बातचीत के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:
- ईरान: विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ यह वेस्ट एशिया संकट शुरू होने के बाद से छठी बातचीत थी. दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार साझा किए.
- UAE: उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थितियों पर चर्चा की गई.
- कतर: कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान के साथ बातचीत में संघर्ष के अलावा गैस आपूर्ति श्रृंखला पर भी ध्यान दिया गया.
भारतीयों और क्षेत्रीय व्यापार पर इस स्थिति का क्या असर है?
खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह तनाव चिंता का विषय बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की चेतावनी के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है. भारत के लिए राहत की बात यह रही कि रविवार को भारतीय एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने में सफल रहा. भारत ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में संवाद और तनाव कम करने के पक्ष में है और इसके लिए वह प्रमुख देशों के संपर्क में बना रहेगा.
| देश | प्रतिनिधि | प्रमुख चर्चा विषय |
|---|---|---|
| ईरान | अब्बास अराघची | द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय विकास |
| UAE | अब्दुल्ला बिन जायद | पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति |
| कतर | शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान | गैस आपूर्ति और क्षेत्रीय संघर्ष |




