हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने खाड़ी देशों में बड़ी हलचल मचा दी है। 4 मार्च को जारी हुई नई रिपोर्ट्स और तस्वीरों से यह साफ हो गया है कि ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के कई महत्वपूर्ण राडार और डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया है। यह हमले कतर, यूएई, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों में करीब 2 अरब डॉलर (लगभग 16 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है और इसका असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

किन देशों में अमेरिकी ठिकानों को पहुंचा नुकसान?

सैटेलाइट इमेजरी और आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के ‘Operation True Promise 4’ के तहत इन खास जगहों को निशाना बनाया गया। यह जवाबी कार्रवाई अमेरिका के ‘Operation Epic Fury’ के बाद की गई। नीचे दी गई जानकारी में आप देख सकते हैं कि किस देश में अमेरिकी सेना के कौन से सिस्टम को नुकसान पहुंचा है।

देश (Location) नुकसान (Damaged Assets) कीमत (Value)
Qatar 1 AN/FPS-132 अर्ली वार्निंग राडार (Al Udeid) $1.1 Billion
UAE 1 AN/TPY-2 THAAD राडार (Al Ruwais) ~$500 Million
Jordan 1 AN/TPY-2 THAAD राडार (Muwaffaq Salti Air Base) ~$500 Million
Bahrain 2 AN/GSC-52B SATCOM टर्मिनल्स ~$20 Million
Kuwait 3 राडोम और 8 संचार भवन (Arifjan & Ali al-Salem) तय नहीं

आम लोगों और हवाई यात्रा पर इसका क्या असर हुआ?

इस सैन्य तनाव का सीधा असर आम जनजीवन और हवाई यात्राओं पर देखने को मिला है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों को रोका गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अगर आप खाड़ी देशों में रहते हैं या भारत से वहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो उड़ानों में देरी के लिए तैयार रहना चाहिए।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन राडार सिस्टम के नष्ट होने से ‘डिफेंस शील्ड’ कमजोर हुई है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में किसी भी मिसाइल हमले की चेतावनी मिलने का समय कम हो सकता है। यह क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक चिंता का विषय है।

हमले के बाद क्या है मौजूदा हालात?

कतर के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अल-उदीद बेस पर हमला हुआ था, हालांकि कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया था। सैटेलाइट तस्वीरों में कतर के राडार की छत पर मलबा और आग बुझाने के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान ने जानबूझकर उन सिस्टम्स को निशाना बनाया जो अमेरिकी सेना की ‘आंख और कान’ माने जाते हैं, ताकि उनका कम्युनिकेशन नेटवर्क टूट जाए। फिलहाल अमेरिका और स्थानीय सरकारें नुकसान का पूरा आकलन कर रही हैं।