Saudi Arabia Emergency Advisory: लेबनान में बिगड़ते हालात के बीच सऊदी का बड़ा फैसला, नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का निर्देश
सऊदी अरब ने लेबनान में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। बेरूत में सऊदी दूतावास ने वहां के सुरक्षा हालातों को देखते हुए सभी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष की वजह से वहां मानवीय संकट पैदा हो सकता है। दूतावास ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकों की सुरक्षा सबसे जरूरी है।
सऊदी दूतावास की एडवाइजरी में क्या कहा गया है?
सऊदी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए नागरिकों को सूचित किया है। इसमें कहा गया है कि लेबनान में चल रही घटनाओं की वजह से वहां रहना अब सुरक्षित नहीं है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे वर्तमान यात्रा प्रतिबंध का पालन करें और जो लोग वहां मौजूद हैं, वे बिना देरी किए सुरक्षित बाहर निकलें। दूतावास ने आपात स्थिति के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं:
- लेबनान में मौजूद नागरिक तुरंत अपनी यात्रा की जानकारी दूतावास को दें।
- किसी भी इमरजेंसी के मामले में राजनयिक अधिकारियों से संपर्क करें।
- स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
- अनावश्यक यात्रा और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें।
लेबनान में तनाव बढ़ने के मुख्य कारण और ताजा अपडेट
लेबनान में स्थिति मार्च 2026 की शुरुआत से ही खराब होती जा रही है। इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई तेज कर दी है और वे लिटानी नदी के दक्षिणी इलाकों की तरफ बढ़ रहे हैं। इस सैन्य अभियान की वजह से पूरे इलाके में भारी विस्थापन हुआ है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, लेबनान में मानवीय स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
| विवरण | ताजा आंकड़े और जानकारी |
|---|---|
| विस्थापित लोग | 10 लाख से ज्यादा (कुल आबादी का 20%) |
| सैन्य कार्रवाई की शुरुआत | 16 मार्च 2026 से जमीनी ऑपरेशन शुरू |
| प्रभावित इलाके | दक्षिणी लेबनान और मध्य बेरूत |
| संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी | मानवीय आपदा का गंभीर खतरा |
इजराइल की तरफ से हवाई हमले भी जारी हैं, जिसका असर लेबनान की राजधानी बेरूत तक देखा जा रहा है। 30 मार्च 2026 को मिली रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में हुए एक धमाके में UNIFIL के शांतिदूत की भी मौत हुई है। इस पूरे तनाव की वजह से मध्य पूर्व में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे खाड़ी देशों के नागरिकों और वहां काम करने वाले प्रवासियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।




