Saudi Arabia ने इजरायल के फैसले पर जताई कड़ी आपत्ति, वेस्ट बैंक में कब्जे के नए नियम को बताया खतरनाक
Saudi Arabia के विदेश मंत्रालय ने Israel द्वारा West Bank में अपना नियंत्रण और पैठ बढ़ाने के फैसले की कड़ी निंदा की है। इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने रविवार, 8 फरवरी 2026 को वेस्ट बैंक में जमीन खरीदने और निर्माण से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। यह फैसला इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से होने वाली मुलाकात से ठीक तीन दिन पहले आया है। सऊदी अरब ने इसे क्षेत्रीय शांति के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
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Israel ने वेस्ट बैंक के लिए कौन से नियम बदले हैं?
इजरायल की सरकार ने वेस्ट बैंक (जिसे इजरायली कैबिनेट जूडिया और सामरिया कहता है) में जमीन पर नियंत्रण के लिए कई पुराने कानूनों को बदल दिया है। सुरक्षा कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए नए आदेश के तहत अब वहां जमीन खरीदना और उस पर कब्जा करना पहले से आसान हो जाएगा।
- जमीन खरीद का नियम: दशकों पुराने जॉर्डन के समय के कानूनों को हटा दिया गया है, जो पहले यहूदी निजी नागरिकों को वेस्ट बैंक में जमीन खरीदने से रोकते थे।
- रजिस्ट्री रिकॉर्ड: अब जमीन के मालिकाना हक के रिकॉर्ड को सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे यह पता लगाना आसान होगा कि कौन सी जमीन खाली है या किसकी है।
- Hebron में बदलाव: हेब्रोन बस्ती में निर्माण परमिट देने का अधिकार अब फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) नगरपालिका से लेकर इजरायली सरकारी अधिकारियों को दे दिया गया है।
- जमीन अधिग्रहण समिति: एक सरकारी समिति को फिर से शुरू किया गया है जो बस्तियों के विस्तार के लिए ‘सक्रिय रूप’ से जमीन खरीदने का काम करेगी।
बजट में इजरायल ने की पैसों की बारिश
इजरायल ने इन नए नियमों को लागू करने और बस्तियों को बढ़ाने के लिए 2026 के अपने बजट में भारी भरकम राशि आवंटित की है। वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने मिलकर सुरक्षा ढांचे और सड़कों को मजबूत करने के लिए NIS 725 मिलियन (लगभग $192 मिलियन) का तीन साल का बजट तय किया है।
इसके अलावा, Hebron में बसने वाले समुदाय के लिए लगभग NIS 302 मिलियन ($93 मिलियन) अलग से रखे गए हैं। बस्तियों की गतिविधियों के समन्वय के लिए ‘हिल एडमिनिस्ट्रेशन’ नाम की एक नई संस्था बनाई गई है, जिसे 2028 तक सालाना 20 लाख शेकेल दिए जाएंगे। सऊदी अरब, जॉर्डन और OIC ने इन कदमों की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ की उम्मीदें खत्म हो सकती हैं।




