सऊदी अरब का बड़ा बयान, ईरान पर हमले के लिए ट्रंप पर दबाव बनाने की खबरों को नकारा
वाशिंगटन में सऊदी दूतावास के प्रवक्ता फहद नाजर ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि सऊदी अरब ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर हमले की सिफारिश की थी। नाजर ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि सऊदी अरब ने हमेशा शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है। यह सफाई ऐसे समय में आई है जब हाल ही में अमेरिका और इजरायल के साझा हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हुई है।
ईरान पर हमले और उसके बाद का तनाव
28 फरवरी से 1 मार्च 2026 के बीच ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नाम से ईरान पर बड़े सैन्य हमले हुए थे। इन हमलों में इजरायल और अमेरिका शामिल थे और इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई कमांडरों की मौत हुई है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। ईरान के इन हमलों का सीधा असर दुबई, दोहा और मनामा जैसे शहरों पर पड़ा है। इस स्थिति ने खाड़ी में काम कर रहे लाखों प्रवासी भारतीयों और अन्य विदेशी कामगारों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है।
सऊदी अरब के बयान और अमेरिकी रिपोर्ट का सच
वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने निजी बातचीत में अमेरिका से ईरान पर सख्त सैन्य कदम उठाने को कहा था। सऊदी प्रवक्ता फहद नाजर ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि रियाद ने कभी भी ट्रंप प्रशासन से अपनी कूटनीतिक नीति बदलने को नहीं कहा। फिलहाल सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देशों ने एक साझा बयान जारी कर आम लोगों और बुनियादी ढांचे पर ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की है।
खाड़ी देशों में हुई प्रमुख घटनाओं का विवरण इस प्रकार है:
| घटना | विवरण |
|---|---|
| सैन्य अभियान | अमेरिका और इजरायल का ईरान पर हमला (ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) |
| ईरान का जवाब | दुबई, दोहा और मनामा में ड्रोन और मिसाइल हमले |
| सऊदी अरब का रुख | कूटनीतिक समाधान का समर्थन और लॉबिंग के दावों का खंडन |
| वर्तमान स्थिति | क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खाड़ी देशों और अमेरिका का साझा बयान |




