Strait of Hormuz में संकट के बीच सऊदी अरब ने उठाया बड़ा कदम, मालवाहक जहाजों के लिए खोले नए रास्ते
Strait of Hormuz में चल रहे मौजूदा संकट के बीच सऊदी अरब दुनिया के लिए एक अहम लॉजिस्टिक सेंटर बनकर सामने आया है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने आधिकारिक तौर पर सऊदी अरब को एक जरूरी ग्लोबल हब माना है। इस समुद्री रास्ते में हो रही दिक्कतों की वजह से मालवाहक जहाजों के रुकने का खतरा बन गया था। अब सऊदी अरब के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके जहाजों और सामानों की सप्लाई को सुचारू रखने का काम किया जा रहा है। इसका सीधा असर खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों और वहां के बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में दिखेगा।
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सऊदी अरब कैसे कर रहा है मदद?
रास्ते में आने वाली रुकावटों से बचने के लिए शिपिंग कंपनियों ने अब सऊदी अरब के रेड सी पोर्ट्स का रुख कर लिया है। अब ज्यादातर कार्गो किंग अब्दुल्ला पोर्ट (Rabigh) और जेद्दा इस्लामिक पोर्ट पर आ रहे हैं। यहाँ से सामान को ट्रकों और सऊदी लैंडब्रिज के जरिए दम्माम, जुबैल के साथ-साथ कुवैत और बहरीन जैसे पड़ोसी देशों में भेजा जा रहा है।
- पाइपलाइन का इस्तेमाल: कच्चे तेल को भेजने के लिए 1200 किलोमीटर लंबी East-West Pipeline (Petroline) का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे रोजाना 5 मिलियन बैरल तेल Yanbu पोर्ट तक सुरक्षित पहुंच रहा है।
- जहाजों का नया रूट: MSC Cargo जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने काम का फोकस अब जेद्दा और राबिघ पोर्ट पर कर दिया है।
- IMO की अहम बैठक: इस संकट से निपटने और आगे की रणनीति तय करने के लिए IMO 18 और 19 मार्च 2026 को लंदन में एक विशेष बैठक करने जा रहा है।
सामान मंगाने पर कंपनियों ने लगाया एक्स्ट्रा चार्ज
Strait of Hormuz में जोखिम बढ़ने के कारण बीमा कंपनियों ने अपना कवर देना बंद कर दिया है। इस वजह से बड़ी शिपिंग कंपनियों ने अपने ग्राहकों पर Emergency Conflict Surcharge लगाना शुरू कर दिया है। यह अतिरिक्त चार्ज उन सभी सामानों पर लगेगा जो सऊदी अरब, UAE और कतर से आते या जाते हैं।
- MSC और Maersk: हर कंटेनर पर 1,800 डॉलर से लेकर 3,800 डॉलर तक का एक्स्ट्रा चार्ज देना होगा।
- CMA CGM: इन कंपनी के कंटेनरों पर 2,000 डॉलर से लेकर 4,000 डॉलर तक का अतिरिक्त चार्ज 2 मार्च 2026 से लागू कर दिया गया है।
सऊदी अरब के परिवहन मंत्री सालेह अल-जासेर ने बताया कि देश की लॉजिस्टिक रणनीति को ऐसे ही संकट के समय के लिए तैयार किया गया था। IMO के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंगुएज ने भी माना है कि सऊदी अरब की इस व्यवस्था से ग्लोबल सप्लाई चेन को बड़ी राहत मिली है।




