Saudi Arabia New Rules: सऊदी अरब के अस्पतालों में डिलीवरी के लिए नया नियम, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई
सऊदी अरब के स्वास्थ्य मंत्रालय (MoH) ने पूरे देश के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में प्रसव (Delivery) विभागों के लिए निगरानी सख्त कर दी है। 9 मार्च 2026 से शुरू हुए इस अभियान का मकसद मां और नवजात बच्चों की सुरक्षा को और भी मजबूत करना है। अब हर स्वास्थ्य केंद्र को मंत्रालय द्वारा तय किए गए मानकों का पालन करना जरूरी होगा। यह फैसला उन हजारों भारतीय और अन्य प्रवासी परिवारों के लिए राहत की बात है जो सऊदी अरब में रहते हैं और वहां की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते हैं।
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अस्पतालों के लिए क्या हैं नए जरूरी नियम?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने डिलीवरी रूम और ऑपरेशन थिएटर के लिए कुछ खास शर्तें रखी हैं जिन्हें हर हाल में पूरा करना होगा। इन नियमों के लागू होने से इमरजेंसी के समय होने वाली परेशानियों को कम किया जा सकेगा। मुख्य नियमों की जानकारी नीचे दी गई है:
- C-section ऑपरेशन रूम: हर अस्पताल में एक पूरी तरह तैयार सिजेरियन ऑपरेशन रूम होना चाहिए जो किसी भी वक्त इस्तेमाल किया जा सके।
- स्पेशलिस्ट डॉक्टर की मौजूदगी: डिलीवरी के समय कम से कम एक Consultant या Senior Registrar का अस्पताल में मौजूद रहना अनिवार्य है।
- इमरजेंसी दवाएं: डिलीवरी से जुड़ी सभी जरूरी और आपातकालीन दवाएं अस्पताल के स्टॉक में हमेशा मौजूद रहनी चाहिए।
- मरीज की सहमति: किसी भी सामान्य प्रक्रिया से पहले अस्पताल को लिखित में Informed Consent लेना होगा।
शिकायत और निगरानी के लिए क्या है तैयारी?
मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि उनकी टीमें बिना बताए अस्पतालों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करेंगी। अगर किसी भी अस्पताल में इन सुविधाओं की कमी पाई गई, तो उन पर भारी कानूनी जुर्माना लगाया जाएगा। सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय नागरिक या कोई भी प्रवासी अगर किसी अस्पताल में लापरवाही देखते हैं, तो वे तुरंत 937 नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मंत्रालय का लक्ष्य पोस्टपार्टम हैमरेज और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए अस्पतालों को हर समय तैयार रखना है।





