सऊदी अरब के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की आवाजाही में रुकावटें अप्रैल के अंत तक जारी रहीं, तो कच्चे तेल की कीमतें 180 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में चल रहे तनाव और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की वजह से वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। इस स्थिति का सीधा असर दुनिया भर के देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर पड़ सकता है।

तेल की कीमतों में उछाल की मुख्य वजह क्या है?

खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में पिछले 24 घंटों के दौरान ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया है। सऊदी अरब के यानबू में स्थित Samref रिफाइनरी पर एक ड्रोन हमला हुआ और कुवैत व कतर में भी तेल और गैस संयंत्रों पर हमले की खबरें आई हैं। ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने की धमकियों और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालेगी।

वैश्विक स्तर पर उठाए जा रहे सुरक्षात्मक कदम

बढ़ते संकट को देखते हुए दुनिया के कई शक्तिशाली देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और बाजार को स्थिर करने की कोशिश शुरू कर दी है।

संस्था/देश लिया गया फैसला या प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र (UNSC) प्रस्ताव 2817 पारित कर ईरान से हमलों को तुरंत रोकने की मांग की गई
अमेरिका (USA) रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से और तेल जारी करने पर विचार कर रहा है
IEA सदस्य देशों को अपने सुरक्षित तेल भंडार का उपयोग करने की अनुमति दी
यूरोपीय देश और जापान समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक सहयोग का वादा किया

सऊदी अरब ने भी स्पष्ट किया है कि वह अपने तेल ठिकानों की सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। यूएई, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों से हवाई किराये और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.