Saudi Real Estate Update: सऊदी अरब और कतर के बीच हुआ बड़ा समझौता, जानिए विदेशियों और प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या होगा असर
सऊदी अरब की कैबिनेट ने 10 मार्च 2026 को कतर के साथ रियल एस्टेट सेक्टर में एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को मंजूरी दे दी है। क्राउन प्रिंस की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले का मकसद दोनों देशों के बीच प्रॉपर्टी मार्केट को बेहतर बनाना और नियमों को एक समान करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सऊदी अरब विदेशियों के लिए अपने रियल एस्टेट मार्केट को तेजी से खोल रहा है।
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समझौते के मुख्य बिंदु क्या हैं?
सऊदी अरब की जनरल रियल एस्टेट अथॉरिटी (REGA) और कतर की रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (Aqarat) मिलकर इस पर काम करेंगे। इसके तहत कई अहम फैसले लिए गए हैं:
- प्रॉपर्टी बाजार के नियमों और शहरी योजना को बेहतर बनाने के लिए दोनों देश अपना अनुभव साझा करेंगे।
- डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने के लिए रियल एस्टेट तकनीक (PropTech) का साझा विकास किया जाएगा।
- प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण कार्य के आंकड़ों को पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि निवेशकों को सही जानकारी मिल सके।
- अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट आयोजनों में दोनों देश एकजुट होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
प्रवासियों और निवेशकों पर इसका क्या असर होगा?
इस समझौते को जनवरी 2026 में लागू हुए विदेशी स्वामित्व कानून (Law of Real Estate Ownership by Non-Saudis) से जोड़कर देखा जा रहा है। इस नए नियम के तहत अब गैर-सऊदी नागरिक भी सऊदी अरब के तय इलाकों में अपनी प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों को प्रॉपर्टी खरीदने की अनुमति नहीं है।
सऊदी अरब के आवास मंत्री माजिद अल-होगैल ने बताया कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी नागरिकों द्वारा प्रॉपर्टी बेचने या ट्रांसफर करने पर अधिकतम 5% फीस रखी गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नई साझेदारी और आसान नियमों के कारण 2029 तक सऊदी का रियल एस्टेट मार्केट 101.62 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा, जिससे भारत और अन्य देशों के निवेशकों को एक सुरक्षित और पारदर्शी बाजार मिलेगा।




