Saudi-US Talks: सऊदी अरब और अमेरिका के बीच अहम बातचीत, ईरान के हमलों पर लिया बड़ा फैसला
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बुधवार को एक अहम फोन कॉल पर बातचीत हुई. इस चर्चा में मुख्य रूप से ईरान द्वारा सऊदी अरब और क्षेत्र में किए जा रहे लगातार हमलों को लेकर बात की गई. दोनों नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे इन हालात को काबू में किया जाए ताकि सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत रहे और वहां रहने वाले नागरिकों के साथ-साथ प्रवासियों की हिफाजत सुनिश्चित हो सके. इसके अलावा सूडान के मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित करने के अमेरिकी फैसले का सऊदी अरब ने स्वागत किया है.
ईरान के हमलों को लेकर क्या चर्चा हुई?
हाल ही में ईरान की तरफ से सऊदी अरब और आस-पास के क्षेत्रों में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल से हमले किए गए हैं. सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की तरफ से आने वाले कई मिसाइलों को नष्ट कर दिया है. मार्को रुबियो ने नागरिकों पर ईरान के इन बिना वजह के हमलों की निंदा की.
प्रिंस फैसल और रुबियो ने माना कि इस तरह के हमले क्षेत्र की शांति को भंग कर रहे हैं. इसके जवाब में सऊदी अरब अपनी सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत करने पर काम कर रहा है. इसका सीधा असर वहां काम करने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों की सुरक्षा पर भी पड़ता है, इसलिए दोनों देशों ने आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. पेंटागन के अनुसार इस संघर्ष में अब तक 140 अमेरिकी सैनिक भी घायल हो चुके हैं.
सूडान के मुस्लिम ब्रदरहुड पर क्या पाबंदियां लगी हैं?
अमेरिका ने 9 मार्च 2026 को सूडान के मुस्लिम ब्रदरहुड को ग्लोबल आतंकी संगठन घोषित किया है और 16 मार्च से इसे पूर्ण रूप से विदेशी आतंकवादी संगठन की सूची में डाल दिया जाएगा. अमेरिका का कहना है कि यह संगठन ईरान के सहयोग से नागरिकों पर हिंसा कर रहा है.
- इस संगठन की अमेरिका में मौजूद सभी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है.
- अमेरिकी नागरिकों या कंपनियों को इस संगठन के साथ किसी भी तरह का व्यापार करने से रोक दिया गया है.
- जो भी बाहरी व्यक्ति या कंपनी इस संगठन के साथ काम करेगी, उस पर भी बैन लगाया जाएगा.
- इससे पहले जनवरी में मिस्र, जॉर्डन और लेबनान में भी इस संगठन की शाखाओं पर बैन लगा था.
सऊदी अरब ने अमेरिका के इस कदम का पूरा समर्थन किया है और कहा है कि यह फैसला इस क्षेत्र में शांति और तरक्की लाने में मददगार साबित होगा.




