सऊदी अरब की कैबिनेट ने इराक की जमीन से सऊदी और GCC देशों पर हुए ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सऊदी सरकार ने साफ कहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना अब इराक सरकार की जिम्मेदारी है।

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सऊदी अरब ने इराक सरकार से क्या कहा?

सऊदी कैबिनेट ने अपना कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि इराक से होने वाले ड्रोन हमले क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं। सरकार ने इराक को चेतावनी दी है कि वह अपनी जमीन से होने वाली इन संदिग्ध गतिविधियों को रोके। सऊदी अरब ने साफ किया कि वह अपनी सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।

हाल के दिनों में क्या-क्या घटनाएँ हुईं?

  • 12 अप्रैल 2026: सऊदी विदेश मंत्रालय ने इराक की राजदूत सफिया तालेब अल-सुहेल को बुलाकर आधिकारिक विरोध नोट सौंपा।
  • 14 अप्रैल 2026: सऊदी कैबिनेट ने ड्रोन हमलों की औपचारिक निंदा की और इराक की जिम्मेदारी तय की।
  • अमेरिका की कार्रवाई: अमेरिका ने भी इराक के राजदूत निज़ार खिरुल्ला को बुलाकर बगदाद में अमेरिकी सुविधाओं पर हुए हमलों पर चिंता जताई।
  • मार्च 2026: सऊदी, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन ने मिलकर इन हमलों के खिलाफ एक साझा बयान जारी किया था।

इन हमलों के पीछे किसका हाथ माना जा रहा है?

सऊदी अधिकारियों का मानना है कि इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया इन ड्रोन हमलों को अंजाम दे रहे हैं या इसमें मदद कर रहे हैं। अमेरिका ने भी बगदाद में हुए हमलों के लिए इन्हीं समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। इन घटनाओं से पूरे गल्फ क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।