Saudi Arabia News: अल-अक्सा मस्जिद में इसराइली मंत्री के घुसने पर सऊदी ने जताई कड़ी आपत्ति, पवित्र स्थल की गरिमा का दिया हवाला
सऊदी अरब ने इसराइली सरकार के एक मंत्री द्वारा अल-अक्सा मस्जिद के आंगन में जबरन घुसने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस घटना के दौरान इसराइली सुरक्षा बल भी मंत्री के साथ मौजूद थे। रियाद ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए अपनी गहरी चिंता ज़ाहिर की है। पिछले काफी समय से इस पवित्र स्थल पर पाबंदियां लगी हुई हैं जिससे दुनिया भर के मुस्लिमों में रोष देखा जा रहा है।
घटना की मुख्य जानकारी और सऊदी का आधिकारिक बयान
सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह इस तरह के कृत्यों को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir ने सोमवार 6 अप्रैल 2026 को भारी सुरक्षा घेरे में मस्जिद परिसर का दौरा किया। सऊदी ने साफ किया कि यरूशलेम में इबादत की आजादी पर इस तरह की पाबंदियां लगाना गलत है। यह मस्जिद 28 फरवरी 2026 से लगभग 38 दिनों से लगातार बंद चल रही है। इसकी वजह से पहली बार रमजान और ईद की नमाज भी मस्जिद के अंदर नहीं हो सकी थी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और अन्य देशों का क्या है कहना?
सऊदी के अलावा अन्य खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इस घटना पर अपनी नाराजगी जताई है। विभिन्न देशों के बयानों को नीचे दी गई सूची से समझा जा सकता है:
- Jordan: जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इसे एक अस्वीकार्य उकसावा और पवित्र स्थल की कानूनी स्थिति का उल्लंघन बताया है।
- Qatar: कतर ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन और दुनिया भर के मुस्लिमों को भड़काने वाला कदम करार दिया है।
- Palestine: फिलिस्तीन के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने इसे मस्जिद पर सीधा हमला बताया और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है।
- Joint Statement: सऊदी अरब, यूएई, कतर और पाकिस्तान जैसे देशों ने संयुक्त बयान में कहा है कि पूरा अल-अक्सा क्षेत्र केवल मुस्लिमों के लिए है।
आम यात्रियों और प्रवासियों पर इस स्थिति का क्या होगा असर?
यरूशलेम में चल रहे तनाव और पवित्र स्थलों की बंदी का सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ता है जो वहां धार्मिक यात्रा या घूमने के लिए जाते हैं। इसराइली अधिकारियों ने वहां इमरजेंसी का हवाला देते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी है। नई पुलिस योजना के अनुसार, अब एक समय में केवल 150 लोगों को ही मस्जिद में जाने की अनुमति देने का विचार किया जा रहा है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासी जो यरूशलेम जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें वर्तमान प्रतिबंधों और सुरक्षा नियमों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि स्थितियां अभी सामान्य नहीं हैं।




