सऊदी अरब जल्द ही मिस्र और सोमालिया के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक सैन्य समझौते को अंतिम रूप दे सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब हॉर्न ऑफ अफ्रीका में तनाव लगातार बढ़ रहा है और सोमालिया ने अपनी संप्रभुता के उल्लंघन को लेकर UAE के प्रति नाराजगी जाहिर की है।
सोमालिया के राष्ट्रपति का रियाद दौरा और समझौते की रूपरेखा
सोमालिया के राष्ट्रपति हसन शेख मोहम्मद जल्द ही इस रक्षा समझौते पर मुहर लगाने के लिए रियाद का दौरा करने वाले हैं। इस सहयोग का प्रमुख लक्ष्य लाल सागर (Red Sea) की सुरक्षा को मजबूत करना और सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है। यह समझौता विशेष रूप से सोमालीलैंड और पुंटलैंड जैसे अलगववादी क्षेत्रों के खिलाफ सोमालिया की केंद्र सरकार को ताकत देगा। इससे पहले सोमालिया ने यमनी अलगाववादी नेता को रास्ता देने और अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए UAE के साथ सुरक्षा और बंदरगाह समझौतों को रद्द कर दिया था।
यमन में सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ता तनाव
हाल के दिनों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्तों में काफी कड़वाहट देखी गई है। सऊदी अरब ने यमन से UAE के सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। 30 दिसंबर को मुकला में UAE से जुड़े हथियारों की खेप पर बमबारी और यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल द्वारा अमीराती बलों को छोड़ने की मांग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस बीच, मिस्र ने यमन में UAE के ऑपरेशन्स की खुफिया जानकारी साझा करके सऊदी अरब के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं, ताकि वह सऊदी का समर्थन दोबारा हासिल कर सके।
बंदरगाहों को लेकर विवाद और रणनीतिक हित
इस पूरे घटनाक्रम में बंदरगाहों पर नियंत्रण एक बड़ा मुद्दा है। संयुक्त अरब अमीरात ने मोगादिशु (सोमालिया की सरकार) को दरकिनार करते हुए सोमालीलैंड के बरबेरा पोर्ट और पुंटलैंड के बोसासो पोर्ट में निवेश किया है। दूसरी ओर, सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने इजरायल द्वारा सोमालीलैंड को मान्यता देने की निंदा की है और आतंकी संगठन अल-शबाब के खिलाफ सोमालिया का समर्थन किया है। UAE इजरायल के साथ अपने संबंधों को बढ़ा रहा है, जबकि सऊदी अरब इसके खिलाफ एक नया गुट तैयार कर रहा है।
सऊदी अरब और UAE की नीतियों में अंतर
हॉर्न ऑफ अफ्रीका और यमन में दोनों देशों की रणनीतियों में स्पष्ट विरोधाभास है, जिसे नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:
| विषय | सऊदी अरब और सहयोगी (मिस्र, सोमालिया) | संयुक्त अरब अमीरात (UAE) |
|---|---|---|
| मुख्य सहयोगी | सोमालिया की केंद्र सरकार (मोगादिशु) | सोमालीलैंड और पुंटलैंड (अलगाववादी क्षेत्र) |
| प्राथमिकता | सोमालिया की अखंडता और लाल सागर सुरक्षा | बंदरगाहों पर नियंत्रण और इजरायल के साथ संबंध |
| यमन में रुख | UAE सैनिकों की वापसी की मांग | दक्षिणी यमन में सैन्य उपस्थिति और प्रभाव |
अरब रक्षा नेटवर्क और नए समीकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उभरता हुआ गठबंधन एक व्यापक बदलाव का संकेत है। सऊदी अरब एक ऐसा अरब रक्षा नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहा है जो UAE और इजरायल के गठबंधन का विरोध कर सके। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भविष्य में तुर्की और पाकिस्तान भी इससे जुड़े समझौतों का हिस्सा बन सकते हैं। सोमालिया के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि डील पर काम चल रहा है, लेकिन सऊदी और मिस्र के अधिकारियों ने अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। 16 जनवरी 2026 तक की जानकारी के अनुसार, यह समझौता अभी पूरी तरह से फाइनल नहीं हुआ है।
Last Updated: 17 January 2026




