सऊदी प्रिंस और नेतन्याहू ने ट्रंप पर बनाया था दबाव, ईरान पर हमले के लिए बार-बार किया था फोन
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ट्रंप के कार्यकाल के दौरान इन नेताओं के बीच लगातार बातचीत होती थी। इस दौरान ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच रणनीति पर चर्चा की जाती थी और अमेरिकी राष्ट्रपति को हमला करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
अमेरिकी राष्ट्रपति और अरब नेताओं के बीच कैसी होती थी बातचीत?
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की थी कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच लगभग हर दिन बात होती थी। इसके साथ ही ट्रंप सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ भी नियमित रूप से संपर्क में थे। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन बातचीत का मुख्य उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाए रखना और उस पर हमला करना था। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस लगातार ट्रंप को सलाह देते थे कि अमेरिका को ईरान पर प्रहार जारी रखना चाहिए ताकि उसकी ताकत कम हो सके।
ईरान को लेकर सऊदी अरब के पुराने रुख का क्या था असर?
प्रिंस सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप को वही सलाह दी थी जो साल 2015 में गुजर चुके सऊदी राजा अब्दुल्ला ने वॉशिंगटन को बार-बार दी थी। उन्होंने ईरान के खतरे को खत्म करने के लिए ‘सांप का सिर काट दो’ वाले पुराने संदेश को दोहराया था। इस पूरे मामले से जुड़े मुख्य तथ्य नीचे दी गई सूची में दिए गए हैं:
- सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप पर ईरान के खिलाफ लगातार प्रहार करने का दबाव बनाया था।
- बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ईरान के मुद्दे पर ट्रंप को कई बार फोन किया था और कार्रवाई की मांग की थी।
- व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने नेताओं के बीच नियमित रूप से होने वाली बातचीत की खबरों को सही बताया था।
- रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब की रणनीति हमेशा से ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने की रही थी।
- इन बातचीत के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान की घेराबंदी पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया था।




