इस्लामाबाद में सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक रविवार को शुरू हुई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाशना और क्षेत्रीय शांति के लिए एक मजबूत योजना तैयार करना है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और अन्य देशों के मंत्रियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

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इस बैठक का मुख्य एजेंडा और शामिल होने वाले नेता कौन हैं?

यह बैठक 29 मार्च 2026 को शुरू हुई है जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार कर रहे हैं। इसमें सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान हिस्सा ले रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति लाने के लिए गंभीर राजनयिक प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता भी कर रहा है ताकि चल रहे संघर्षों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके।

बैठक के दौरान हुई चर्चा और मौजूदा हालातों का असर

  • सऊदी विदेश मंत्री ने पाकिस्तान और मिस्र के अपने समकक्षों के साथ अलग से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की है।
  • बैठक में मिडिल ईस्ट के संकट को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
  • क्षेत्र में तनाव बढ़ने की वजह से दुनिया भर में तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
  • ऊर्जा आपूर्ति की समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने केरोसिन से जुड़े नियमों में कुछ राहत दी है।
  • तनाव के कारण व्यापारिक रास्तों में भी बदलाव हुआ है, जिससे जेद्दा पोर्ट पर जहाजों और ट्रकों की भीड़ बढ़ी है।

बैठक में शामिल देशों और उनकी भूमिका की जानकारी

देश मुख्य प्रतिनिधि मुख्य फोकस
Saudi Arabia Prince Faisal bin Farhan क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता
Pakistan Ishaq Dar मध्यस्थता और राजनयिक प्रयास
Egypt Badr Abdelatty शांति के लिए संयुक्त कार्रवाई
Turkiye Hakan Fidan तनाव कम करने की रणनीति

क्षेत्रीय स्थिति की बात करें तो ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते मिसाइल हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। ईरान के संसद अध्यक्ष ने अमेरिका पर गुप्त रणनीति बनाने का आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान और ईरान के नेताओं के बीच भी क्षेत्रीय दुश्मनी खत्म करने और आपसी भरोसा बनाने को लेकर बातचीत हुई है। इस बैठक के नतीजों का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां के व्यापार पर पड़ने की उम्मीद है।