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सऊदी में भारतीय कामगार का काटना पड़ेगा हाथ, कई के पास खाने और रहने का व्यवस्था तक नही

Lov Singh by Lov Singh
मई 16, 2020
in Saudi
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“मेरे पिता 15 दिनों से मदीना शहर के किंग फ़हद अस्पताल में भर्ती हैं. वो डायबिटीज़ के मरीज़ हैं. डॉक्टर ने कहा है कि कोहनी से नीचे, उनका हाथ काटना पड़ेगा.”
“उनकी हालत बहुत ख़राब है, उन्हें तत्काल सर्जरी के लिए भारत आना है. हम आपसे मदद की गुज़ारिश करते हैं.”

हैदराबाद के रहने वाले सैयद इमरान ने सऊदी अरब में भारतीय दूतावास के उस ट्वीट के जवाब में ये अपील की है, जिसमें दूतावास ने इस सप्ताह विदेश में कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में फंसे प्रवासी भारतीयों को भारत लाने का काम शुरू होने की बात की है.
पहले हफ़्ते में लगभग 15 हज़ार लोगों को भारत लाया जाएगा. सऊदी अरब से एयर इंडिया की पांच उड़ानों में वहां फंसे भारतीयों को लाने का काम आठ मई से शुरू होगा.
दूसरे कई और ट्वीट्स से सऊदी अरब में फंसे प्रवासी भारतीयों की दशा का अंदाज़ा होता है. ख़ास तौर से उन लोगों की दशा, जो वहां मज़दूरी करने गए थे और लॉकडाउन के कारण अब अपनी नौकरी गँवा बैठे हैं.
 
तनवीर नाम के एक व्यक्ति ने दूतावास को ट्वीट कर कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि कुछ मज़दूरों ने नौकरियां खो दी हैं, वो अपने कमरों में बैठे हैं. उनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है. अब आप उन्हें घर जाने के लिए मौक़ा तो दे रहे हैं लेकिन वो इसके लिए टिकट कैसे खरीद सकते हैं? टिकट बहुत महंगा है. कृपया इसके बारे में विचार करें.”
 

 

कई मज़दूरों की नौकरियां गईं

बिहार में गया ज़िले के मोहम्मद तनवीर अख़्तर सऊदी अरब में 1997 से एक ट्रैवल एजेंसी में अकाउंटेंट के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने मदीना से फ़ोन पर बताया कि इस महीने की पूरी तनख़्वाह उन्हें मिल गई है लेकिन उनकी कंपनी में सब उनकी तरह खुशक़िस्मत नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे मेरा पूरा वेतन मिल गया है. कंपनी में कुछ लोगों को आधा मिला है और कुछ को बाद में मिलेगा.”
सोमवार को सऊदी मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय ने कोरोना महामारी से प्रभावित निजी कंपनियों को इस बात की इजाज़त दी थी कि वो अगले छह महीने तक के लिए अपने कर्मचारियों के वेतन में 40 प्रतिशत तक की कटौती कर सकते हैं.
महामारी के असर को देखते हुए छह महीने के बाद कर्मचारियों की नौकरियां ख़त्म करने की अनुमति भी कंपनियों को दी गई थी.
आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होते ही निर्णय प्रभावी हो जाता है और इससे ये सुनिश्चित हो जाता है कर्मचारी को उसका वेतन मिलेगा, हालांकि कम मिलेगा. यहां किसी कर्मचारी को छह महीने के भीतर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता.
सऊदी अरब के शहर जेद्दा और राजधानी रियाद में दो अलग-अलग प्रवासी भारतीयों ने बताया कि इस महीने उन्हें 30 प्रतिशत कम वेतन मिला है.
जेद्दा में रहने वाले शख़्स वहां के एक सरकारी अस्पताल के स्टोर में मैनेजर हैं. उन्होंने बताया कि मज़दूर तबके में कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनकी देखभाल फ़िलहाल कंपनियां कर रही हैं.
दूसरी तरफ़ रियाद में रह रहे जिस भारतीय से हमारी बात हुई उनके अनुसार कई मज़दूर ऐसे हैं जो भारत लौटना चाहते हैं लेकिन उनके पास टिकट के पैसे नहीं हैं.
 

 

किराया देने के भी पैसे नहीं…

सऊदी अरब में भारतीय दूतावास के अनुसार वहां 26 लाख प्रवासी भारतीय काम करते हैं और हर साल भारत में रह रहे अपने परिजनों को 30 अरब डॉलर के क़रीब धनराशि भेजते हैं.
मोहम्मद तनवीर अख़्तर बताते हैं, “दवा कंपनियों और चकित्सा से जुड़े सभी उद्योग काम कर रहे हैं. वहां लोगों की नौकरियां नहीं गई हैं और उन्हें वेतन भी समय पर मिल रहा है. लेकिन निजी क्षेत्र में कंस्ट्रक्शन का काम पूरी तरह ठप पड़ गया है जिसके कारण कई लोगों बेरोज़गार हो गए हैं.”
उन्होंने बताया कि भारतीय मज़दूर बड़ी संख्या में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम करते हैं और वहां काम पूरी तरह रुका हुआ है. सिर्फ़ सऊदी सरकार की तरफ़ से हाइवे और सड़कें बनाने का काम जारी है.
दूसरे देशों की तरह सऊदी अरब भी कोरोना महामारी की चपेट में है और वहां की अर्थव्यवस्था भी लॉकडाउन के कारण काफ़ी प्रभावित हुई है.
सऊदी सरकार ने निजी कंपनियों के लिए आर्थिक सहायता के एक बड़े पैकेज की घोषणा की है जिसके तहत कोई कंपनी अगले छह महीने तक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल नहीं सकती. बेरोज़गार और नौकरी से निकाले जाने वाले प्रवासी भारतीयों को वहां से भारत लाने के भारत सरकार के प्रयासों को भी प्राथमिकता की सूची में रखा गया है.
भारतीय दूतावास के एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार वापस लौटने वालों के लिए विमान के इकोनॉमी क्लास का सबसे सस्ता टिकट 20 हज़ार रुपये का है जबकि सबसे महंगा 30 हज़ार रुपये का. लेकिन कई मज़दूरों का कहना है कि वो किराया देने की स्थिति में भी नहीं हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ अब तक दो लाख प्रवासी भारतीयों ने भारत के दूतावासों में वापस आने के लिए अपना नाम रजिस्टर करवाया है, जिनमें से 60 हज़ार अकेले सऊदी अरब के हैं.
 

 
इस हफ़्ते सऊदी अरब से केवल पांच उड़ानें केरल और दिल्ली आएंगी और हर विमान में लगभग 200 यात्री होंगे. यानी पहले हफ़्ते में सऊदी अरब से लगभग 1,000 प्रवासी भारतीयों को ही भारत लाया जा सकेगा.
प्रवासी भारतीयों के वापस लाने का सिलसिला कब तक चलेगा, सरकार ने इसकी जानकारी नहीं दी है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि ये कुछ सप्ताह तक चलेगा.
भारत सरकार ने लॉकडाउन के तीसरे चरण के तहत 17 मई तक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें स्थगित कर रखी हैं.GulfHindi.com


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बिहार से हूँ। बिहार होने पर गर्व हैं। फर्जी ख़बरों की क्लास लगाता हूँ। प्रवासियों को दोस्त हूँ। भारत मेरा सबकुछ हैं। Instagram पर @nyabihar तथा [email protected] पर संपर्क कर सकते हैं।

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