Sri Lanka Economic Crisis: ईरान और अमेरिका की जंग से श्रीलंका में बढ़ी मुसीबत, पेट्रोल-डीजल की राशनिंग शुरू और बिजली 40% महंगी हुई
ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच चल रहे युद्ध का सीधा असर अब श्रीलंका की कमजोर अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। श्रीलंका में ईंधन की भारी कमी के कारण पेट्रोल और डीजल की राशनिंग शुरू कर दी गई है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायक ने चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में रुकावट आने से आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। देश में बिजली की कीमतों में भी 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है ताकि आर्थिक बोझ को संभाला जा सके।
श्रीलंका में आम जनता पर क्या असर पड़ा है?
सरकार ने तेल की खपत कम करने के लिए देश में QR कोड आधारित राशनिंग सिस्टम को फिर से लागू कर दिया है। इसके अलावा बिजली बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों में बुधवार को विशेष छुट्टी घोषित कर दी गई है ताकि दफ्तरों में होने वाली खपत को कम किया जा सके। सार्वजनिक जगहों पर लगी स्ट्रीट लाइट्स और विज्ञापन बोर्ड की लाइटों को रात में एक निश्चित समय के बाद बंद रखने का सख्त निर्देश दिया गया है।
- ईंधन राशनिंग: पेट्रोल और डीजल अब केवल तय सीमा में QR कोड के जरिए मिल रहा है।
- महंगाई: ईंधन की कीमतों में एक तिहाई और बिजली की दरों में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।
- कृषि सहायता: किसानों को जुताई के लिए 20 लीटर और कटाई के लिए 15 लीटर प्रति एकड़ डीजल बिना QR कोड के दिया जा रहा है।
- IMF की शर्तें: बेलआउट पैकेज के कारण सरकार को तेल और बिजली पर सब्सिडी खत्म करनी पड़ी है।
युद्ध और सप्लाई रुकने की मुख्य वजह क्या है?
इस संकट की सबसे बड़ी वजह हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की सप्लाई का बाधित होना है। अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है जिससे समुद्री रास्तों से होने वाला व्यापार बेहद मुश्किल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समुद्री रास्तों पर हमले रोकने के लिए 7 अप्रैल 2026 की रात 8 बजे तक का समय दिया है। श्रीलंका अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है और युद्ध की वजह से होने वाले इस बाहरी झटके ने देश को 2022 जैसे आर्थिक संकट की याद दिला दी है।




