27 मार्च 2026 को ईरान की IRGC नेवी ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग में किसी भी तरह की हलचल होने पर उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ उनकी कूटनीतिक बातचीत काफी अच्छी रही है और ईरान समझौते के लिए हाथ-पैर मार रहा है। ट्रंप ने ईरान को इस रास्ते को फिर से खोलने के लिए दी गई समय सीमा को अब 6 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से क्या होंगे बड़े बदलाव?
मार्च 2026 की शुरुआत से ही इस समुद्री रास्ते के बंद होने की वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट खड़ा हो गया है। ईरान की IRGC नेवी ने स्पष्ट कहा है कि जब तक उनके नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों को दोबारा नहीं बनाया जाता, तब तक यह रास्ता बंद ही रहेगा। ईरान ने अब इस रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक तरह का ‘टोल बूथ’ सिस्टम भी शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि यह रास्ता केवल उन जहाजों के लिए खुला है जो उसके दुश्मनों से जुड़े नहीं हैं, लेकिन इसके लिए तेहरान के साथ सुरक्षा तालमेल करना जरूरी होगा।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के मुख्य बिंदु क्या हैं?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस टकराव में कई बड़ी बातें सामने आई हैं जो इस प्रकार हैं:
| विषय | ताज़ा अपडेट |
|---|---|
| समय सीमा (Deadline) | ट्रंप ने ईरान के लिए डेडलाइन बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी है |
| सैन्य गतिविधियां | अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर नजर रखने के लिए अपाचे हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं |
| ईरान की चेतावनी | क्षेत्र में अमेरिका और इज़राइल के पानी और ऊर्जा प्लांट पर हमले की धमकी |
| शांति योजना | ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री संघर्ष विराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज किया |
| मिसाइल हमले | अमेरिकी और इज़राइली सेना लगातार ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बना रही है |
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी और इज़राइली हमलों की कड़ी आलोचना की है। वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का कहना है कि बाहरी धमकियों से ईरान की एकता और ज्यादा मजबूत हो रही है। अमेरिका अब इस क्षेत्र में और अधिक जमीनी सैनिकों को तैनात करने पर विचार कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने तेल की कमी को देखते हुए अपने सुरक्षित भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
