Strait of Hormuz बंद होने से भारत में खाद संकट की आहट, DAP और यूरिया की कीमतों पर पड़ेगा सीधा असर
ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने के फैसले ने भारतीय उर्वरक यानी फर्टिलाइजर क्षेत्र के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। हालांकि भारत के पास अभी खाद का कुछ समय के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और इनपुट लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। विशेष रूप से Di-Ammonium Phosphate (DAP) के आयात पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है क्योंकि भारत इसके लिए पूरी तरह विदेशी आयात पर निर्भर है।
खाद सेक्टर और किसानों पर क्या होगा इसका असर?
दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत खाद निर्यात Strait of Hormuz के रास्ते ही होता है, जिसमें यूरिया, अमोनिया और फॉस्फेट शामिल हैं। इस रास्ते के बंद होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है और सप्लाई चैन में रुकावट आई है। भारत को अब अपनी जरूरतों के लिए मोरक्को और जॉर्डन जैसे देशों से महंगे विकल्पों की तलाश करनी पड़ रही है। चीन ने भी अपने घरेलू स्टॉक को बचाने के लिए निर्यात कम कर दिया है, जिससे भारत की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
भारत सरकार और कंपनियों द्वारा उठाए गए जरूरी कदम
संकट की इस घड़ी में भारत सरकार और निजी कंपनियां वैकल्पिक रास्तों और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। शिपिंग एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक चली तो खाद की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कुछ प्रमुख कदम और मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
- महाराष्ट्र में ICL Group ने नया फर्टिलाइजर प्लांट शुरू किया है ताकि स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिले।
- भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस की सप्लाई में खाद सेक्टर की प्राथमिकता को दूसरे नंबर पर रखा है।
- विदेश मंत्रालय और एस जयशंकर लगातार समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक बातचीत कर रहे हैं।
- भारत अब रूस से खाद का आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
- मई के महीने में खरीफ सीजन की मांग शुरू होने से पहले स्टॉक सुरक्षित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।




