देश में पिताओं को मिलने वाली छुट्टी यानी Paternity leave को लेकर Supreme Court ने एक बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने केंद्र सरकार को यह सलाह दी है कि पिताओं को भी छुट्टी मिलने के लिए एक पक्का कानून बनाया जाए। कोर्ट का मानना है कि इसे एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में देखा जाना चाहिए। अदालत के अनुसार बच्चे को पालने की जिम्मेदारी सिर्फ मां की नहीं होती है बल्कि इसमें पिता की भी बराबर की हिस्सेदारी होती है।

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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बच्चे के शुरुआती विकास के लिए माता और पिता दोनों का साथ होना बहुत जरूरी है। अदालत ने सरकार से कहा है कि वह इस विषय पर गंभीरता से विचार करे और पिताओं के लिए भी छुट्टी का प्रावधान तय करे। अभी तक देश में प्राइवेट सेक्टर और कई अन्य जगहों पर पिताओं के लिए छुट्टी का कोई ठोस नियम नहीं है। कोर्ट चाहता है कि सरकार इसे सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर देखे और आम नौकरीपेशा लोगों के लिए एक सही नियम बनाए।

वर्तमान में महिलाओं के लिए क्या नियम हैं?

अगर हम अभी के नियमों की बात करें, तो देश में महिलाओं को मैटरनिटी लीव (Maternity leave) दी जाती है। बच्चे को जन्म देने वाली मां को सरकार और प्राइवेट दोनों जगह 26 हफ्ते की छुट्टी मिलती है। इसके अलावा कुछ अन्य नियम भी मौजूद हैं:

  • बच्चे को गोद लेने वाली माताओं को 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाती है।
  • गोद लेने वाले बच्चे की उम्र से इस छुट्टी पर कोई असर नहीं पड़ता है।
  • महिलाओं के लिए यह नियम पहले से ही कानून का हिस्सा है।

अब अदालत की इस टिप्पणी के बाद उम्मीद है कि सरकार पिताओं के लिए भी कोई नया कदम उठा सकती है जिससे देश और विदेश में नौकरी करने वाले भारतीयों को आने वाले समय में राहत मिल सकती है।