सूरत में रसोई गैस का भारी संकट, 2500 रुपये में मिल रहा छोटा सिलेंडर, घर लौटने लगे मजदूर
गुजरात के सूरत में इन दिनों रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत देखी जा रही है। ईरान युद्ध की वजह से गैस सप्लाई में आई रुकावट ने सूरत के टेक्सटाइल हब को बुरी तरह प्रभावित किया है। गैस न मिलने और ऊंचे दामों की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई कपड़ा मिलें बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं क्योंकि वहां काम करने वाले लोग अब शहर छोड़ रहे हैं।
गैस संकट और सरकार के नए नियम क्या हैं?
केंद्र सरकार ने इस संकट को देखते हुए देशभर में कई कड़े कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि अब उपभोक्ता एक रिफिल बुक करने के बाद कम से कम 25 दिनों तक दूसरा सिलेंडर बुक नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, सरकार ने घरेलू गैस उत्पादन को 40% तक बढ़ा दिया है ताकि घरों तक सप्लाई पहुंचती रहे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि गैस की जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में 4,500 से अधिक छापे मारे गए हैं।
| प्रमुख विवरण | ताजा स्थिति |
|---|---|
| छोटा गैस सिलेंडर | 2,500 रुपये तक में रिफिल |
| गैस की कीमत (खुली) | 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक |
| नया बुकिंग नियम | 25 दिन का अनिवार्य गैप |
| कतर से आयात | हमले के बाद 17% एक्सपोर्ट क्षमता घटी |
| सुरक्षा अपडेट | स्ट्रेच ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाज सुरक्षित |
मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ देखी जा रही है। इस पलायन को रोकने के लिए टेक्सटाइल एसोसिएशन ने सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) शुरू की हैं, जहां 4,000 से ज्यादा मजदूरों को 40 से 50 रुपये में खाना दिया जा रहा है। कुछ मिल मालिकों ने अपने कर्मचारियों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और अनाज उपलब्ध कराना शुरू किया है। प्रशासन ने स्कूलों और अस्पतालों जैसी जरूरी जगहों को कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने की छूट दी है ताकि आम जनता के लिए घरेलू गैस बचाई जा सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, करीब 7.5 लाख उपभोक्ताओं को पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) पर शिफ्ट किया गया है। अधिकारियों ने उन लोगों से एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने की अपील की है जिनके पास पीएनजी की सुविधा मौजूद है। कतर में गैस उत्पादन केंद्रों पर हुए मिसाइल हमलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए कतर पर काफी निर्भर है।




