अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा आर्थिक कदम उठाने का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार के अनुसार राष्ट्रपति के पास उन देशों पर 50% टैरिफ लगाने का पूरा अधिकार है जो ईरान को हथियारों की सप्लाई कर रहे हैं। इस फैसले का सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो ईरान के साथ सैन्य व्यापार में शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसे आर्थिक रूप से अकेला करना है।

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टैरिफ को लेकर क्या है सरकार की नई योजना?

राष्ट्रपति ट्रंप ने 8 और 9 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक रूप से यह चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान को सैन्य मदद पहुंचाएगा उसे भारी टैक्स चुकाना होगा। सरकार ने इसके लिए कुछ मुख्य बिंदुओं पर काम शुरू किया है जो इस प्रकार हैं:

  • ईरान को हथियार देने वाले देशों के सामान पर सीधा 50% टैक्स लगाया जाएगा।
  • यह नियम उन देशों पर भी लागू हो सकता है जो सीधे या परोक्ष रूप से ईरान के साथ व्यापार करते हैं।
  • अमेरिका ने हाल ही में स्टील और तांबे जैसे धातुओं पर भी 50% टैरिफ लगाने का आदेश दिया है।
  • इस कदम को सैन्य टकराव के बजाय आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या इस फैसले के सामने कोई कानूनी अड़चन है?

जानकारों का कहना है कि यह फैसला लागू करना उतना सरल नहीं है क्योंकि फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ आदेशों को रद्द कर दिया था। इसके बाद अब व्हाइट हाउस को नए कानूनी रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है। फिलहाल प्रशासन सेक्शन 301 और नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े सेक्शन 232 जैसे कानूनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। हालांकि इन कानूनों के जरिए टैक्स लागू करने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी हो सकती है लेकिन व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि वह अपने फैसले पर अडिग है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.