अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान असल में अमेरिका के साथ एक समझौता करना चाहता है। ट्रंप के अनुसार, यह समझौता वाशिंगटन और उसके सहयोगियों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है क्योंकि हाल ही में दोनों तरफ से सैन्य हमले भी हुए हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे समझौते के लिए किसी जल्दबाजी में नहीं हैं और जब तक ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक समुद्री नाकेबंदी जारी रहेगी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की क्या हैं मुख्य शर्तें?
ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को लेकर कुछ बहुत ही सख्त शर्तें रखी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वे केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेंगे जो अमेरिका के हित में हो और उसकी रेड लाइन्स को पूरा करता हो। प्रमुख शर्तों में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:
- परमाणु हथियार पर रोक: ईरान को इस बात पर सहमत होना होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): इस समुद्री मार्ग को बिना किसी बाधा और बिना किसी टैक्स के दोनों तरफ के जहाजों के लिए तुरंत खोलना होगा और वहां मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाना होगा।
- यूरेनियम को नष्ट करना: ईरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में नष्ट किया जाएगा।
- प्रतिबंधों में ढील पर रोक: ईरान को ब्लॉक किए गए पैसों तक पहुंच तभी मिलेगी जब सभी शर्तों पर पूरी तरह अमल होगा, फिलहाल अभी कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।
ईरान का इस पूरे मामले पर क्या रुख है?
ट्रंप के दावों के विपरीत ईरान के अधिकारियों ने इस बातचीत को लेकर काफी सावधानी भरा रुख अपनाया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार का कहना है कि वे अमेरिका पर आसानी से भरोसा नहीं कर सकते। ईरान के रुख की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- अपने नियमों पर खुलेंगे रास्ते: ईरान का कहना है कि अमेरिका की नाकेबंदी हटने के बाद ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा, वह भी ईरान की अपनी सुरक्षा शर्तों और जांच के नियमों के आधार पर।
- मसौदे में बदलाव: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी का कहना है कि जब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं हो जाता, तब तक सब कुछ केवल अटकलें हैं। ईरान इस समझौते के मसौदे में अपने कुछ जरूरी बदलाव शामिल करना चाहता है।
- सच्चाई और झूठ का मिश्रण: ईरान के कुछ अधिकारियों ने ट्रंप के बयानों को सच और झूठ का मिला-जुला रूप बताया है।
हालिया सैन्य टकराव और समझौते के बीच तनाव
एक तरफ जहां समझौते की बातें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर सैन्य टकराव भी जारी है। अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) ने मई के आखिरी दिनों में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में 1 जून 2026 को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। इस पूरे मामले में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थता की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल व्हाइट हाउस की बैठक में समझौते के मसौदे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते को लेकर क्या कहा है?
ट्रंप ने कहा कि ईरान सच में अमेरिका के साथ डील करना चाहता है और यह डील अमेरिका व उसके सहयोगियों के हित में होगी, हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे किसी जल्दबाजी में नहीं हैं।
ईरान की इस समझौते को लेकर मुख्य आपत्ति क्या है?
ईरान का मानना है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। ईरान बिना अपने अधिकारों की पूरी गारंटी लिए और अपने संशोधनों के बिना किसी भी समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
