Hormuz Strait में बढ़ेगा तनाव: Donald Trump ने युद्धपोत तैनात करने का किया ऐलान, सहयोगियों ने खड़े किए हाथ
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। ईरान की ओर से की गई प्रभावी नाकाबंदी के बाद ट्रंप ने एक अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन बनाने की मांग की है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कहा कि अमेरिका इस रास्ते को खुलवाने के लिए सैन्य कार्रवाई करने को तैयार है। इस घोषणा के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और व्यापारिक गलियारों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
क्या है अमेरिका की नई योजना और किन देशों ने दिया झटका?
राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो देशों और अन्य सहयोगियों को चेतावनी दी है कि जो देश इस रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का फायदा उठाते हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरानी जहाजों और तटों पर कार्रवाई करेगा। हालांकि, अमेरिका के इस कड़े रुख के बावजूद कई बड़े मित्र देशों ने साथ देने से हिचक दिखाई है और सैन्य अभियान में शामिल होने से मना किया है।
- Japan: प्रधानमंत्री सनाए ताकाची ने कहा कि संवैधानिक सीमाओं के कारण वे फिलहाल युद्धपोत नहीं भेज सकते।
- Australia: सैन्य सहायता भेजने पर कानूनी और राजनीतिक कारणों से अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
- Poland: पोलिश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस सैन्य अभियान में सीधे शामिल नहीं होंगे।
- United Kingdom: ब्रिटेन अभी विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि किसी बड़े युद्ध की स्थिति से बचा जा सके।
तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर क्या असर होगा?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहाँ से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान की घेराबंदी और ट्रंप की चेतावनी के बाद व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बढ़ गया है। कच्चे तेल के भाव में उछाल देखा गया है जो आम आदमी की जेब पर असर डाल सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि सप्लाई चेन में बाधा आने से दैनिक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ता है।
| जानकारी | ताजा आंकड़े |
|---|---|
| Brent Crude की कीमत | $104.63 प्रति बैरल |
| वैश्विक तेल व्यापार हिस्सा | लगभग 20 प्रतिशत |
| हमले का शिकार हुए जहाज | 16 कमर्शियल जहाज |
| तनाव शुरू होने की तारीख | 28 फरवरी 2026 |
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकरे रास्ते में युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने से पूरी दुनिया में ईंधन की सप्लाई रुक सकती है। अमेरिका भले ही अकेले कार्रवाई की बात कर रहा हो, लेकिन सहयोगियों की कमी इस अभियान को काफी जटिल बना सकती है। भारत जैसे देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती हैं क्योंकि खाड़ी देशों से तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।




